सियाचिन (लद्दाख)1 घंटे पहले

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जनरल द्विवेदी की मुलाकात सात जूनियर कमीशंड अधिकारियों (JCOs) और जवानों से हुई।

भारतीय सेना प्रमुख (COAS) जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने विश्व के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन में एक अग्रिम चौकी का दौरा किया और 18 जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स (18 JAK RIF) के जवानों से मुलाकात की।

यह दौरा बेहद भावनात्मक रहा, क्योंकि यहीं से वे कभी एक युवा अधिकारी के रूप में सेना में नियुक्त हुए थे और इसी बटालियन का उन्होंने नेतृत्व भी किया था।

पुराने साथियों से मिलना एक भावुक क्षण था दौरे के दौरान एक अत्यंत मार्मिक क्षण उस समय आया, जब जनरल द्विवेदी की मुलाकात उन्हीं सात जूनियर कमीशंड अधिकारियों (JCOs) और जवानों से हुई, जिन्होंने उनके नेतृत्व में बतौर युवा सैनिक अपनी सेवाएं देनी शुरू की थीं।

उन्होंने कहा कि वर्षों बाद उसी बटालियन में अपने पुराने साथियों से मिलना एक भावुक क्षण था। उन्होंने बर्फीली ऊंचाइयों में अपने पुराने दिनों को याद करते हुए सैनिकों से लंबी बातचीत भी की।

कारगिल विजय दिवस ‘ऑल-आर्म्स ब्रिगेड’ के गठन की घोषणा की इससे पहले शनिवार को सेना प्रमुख ने 26वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर द्रास में कारगिल युद्ध स्मारक पर अपने संबोधन के दौरान ‘रुद्र’ नामक एक नई ‘ऑल-आर्म्स ब्रिगेड’ के गठन की घोषणा की थी।

उन्होंने कहा कि ब्रिगेड के लिए मंजूरी एक दिन पहले ही दी गई थी, जो भारत की परिचालन क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आतंकवाद का समर्थन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा उन्होंने आगे कहा कि ऑपरेशन विजय की विरासत को जारी रखते हुए भारतीय जवानों ने एक बार फिर पाकिस्तान की आक्रामक सैन्य कार्रवाइयों को विफल कर दिया। इससे एक मजबूत और साफ संदेश गया कि आतंकवाद का समर्थन और उनकी मदद करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

जनरल द्विवेदी ने इस बात पर जोर दिया कि अटूट संकल्प की यह परंपरा हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी जारी रही, जहां भारतीय सेना ने उसी साहस और दृढ़ संकल्प के साथ पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निर्णायक रूप से निशाना बनाया और सीमा पार से अन्य शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों से प्रभावी ढंग से निपटा।

ऑपरेशन सिंदूर हमारा संकल्प, संदेश और जवाब है पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा- पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा किया गया कायराना हमला पूरे देश के लिए एक गहरा आघात था।

हालांकि, इस बार भारत ने कोई संदेह व्यक्त नहीं किया, बल्कि सरकार का निर्णय था कि जवाब निर्णायक होगा। देशवासियों के अटूट विश्वास और सरकार द्वारा दी गई रणनीतिक स्वतंत्रता के साथ, भारतीय सेवा ने दृढ़, सटीक और निर्णायक जवाब दिया।

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