नई दिल्ली3 घंटे पहले

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को हेल्थ एडवाइजरी जारी करके कहा कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप (खांसी और सर्दी की दवाएं) न दी जाएं। सरकार ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से 11 बच्चों की मौत की खबरों के बाद एडवाइजरी जारी की है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने ये भी बताया कि दोनों राज्यों से बच्चों की मौत से जुड़े कफ सिरप के सैंपल में किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले कोई टॉक्सिन केमिकल नहीं मिला है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले DGHS ने एडवाइजरी में कहा कि आमतौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं दिया जाना चाहिए। इससे बड़े बच्चों को यदि कफ सिरप दिया जाना है तो उनका उपयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए।

यानी जिस बच्चे को दवा दी जा रही है, उसे कड़ी निगरानी में रखा जाए। उसे ​​उचित खुराक दी जाए। कम से कम समय के लिए दवा दी जाए। कई दवाओं के साथ कफ सिरप नहीं दिया जाए। DGHS की डॉ. सुनीता शर्मा ने यह एडवाइजरी जारी की है।

सभी क्लिनिक अच्छी कंपनी की दवा खरीदें

सभी स्वास्थ्य सेवा केंद्रों और क्लिनिक से कहा गया है कि वे अच्छी कंपनी की और फार्मास्युटिकल-ग्रेड दवाएं खरीदें। यह एडवाइजरी सभी गवर्नमेंट मेडिकल स्टोर्स, प्राइमरी हेल्थ सेंटर, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, जिला अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में लागू की जाए।

सिरप के नमूनों में खतरनाक केमिकल नहीं मिला

मंत्रालय ने मध्य प्रदेश में 9 और राजस्थान में 2 बच्चों की मौतों को कफ सिरप से जोड़ने वाली खबरों पर भी स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने बताया कि नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (NCDC), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), द सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) सहित अन्य एजेंसियों ने कफ सिरप, ब्लड और अन्य सैंपल कलेक्ट किए थे।

मंत्रालय ने बताया कि मध्य प्रदेश की राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने भी तीन नमूनों की जांच की, जिनमें डाइएथिलीन ग्लाइकोल या एथिलीन ग्लाइकोल नहीं मिला। वहीं, NIV पुणे की जांच में एक मामले में लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण की पुष्टि हुई है।

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