हरियाणा में कांग्रेस के पूर्व CM भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद कुमारी सैलजा खेमों में अब खींचतान और बढ़ गई है। पिछले दिनों पूर्व डिप्टी स्पीकर कुलदीप शर्मा करनाल में सैलजा के दो कार्यक्रमों में दिखे। यहां उन्होंने कहा कि वो किसी नेता नहीं बल्कि पार्ट

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इस पर अब हिसार से कांग्रेस सांसद जयप्रकाश शर्मा ने कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि ये अपने कर्मों पर हताश हैं। जिनकी लोकसभा में बुरी हालत हुई और फिर विधानसभा में निर्दलीय से हार गए, वो हुड्डा को लेकर ऐसा कह रहे हैं। पिछले कुछ समय से हुड्डा के करीबी नेता उनसे दूरी बनाते हुए दिख रहे हैं। इनमें करनाल से विधायक रहीं सुमिता सिंह शामिल हैं।

करनाल में पिछले दिनों कार्यक्रम में हुड्डा के करीबी नेता ने कहा था कि जिसका सिर्फ रोहतक के 4 हलकों में प्रभाव रह गया है, वो हरियाणा का चौधरी कैसे? इससे पहले नलवा से टिकट न मिलने के बाद पूर्व वित्त मंत्री संपत सिंह भी हुड्डा से दूरी बनाकर सैलजा के साथ नजर आने लगे थे। हालांकि संपत 25 सितंबर को रोहतक में इनेलो के मंच पर भी पहुंच गए। यहां देवीलाल जयंती पर कार्यक्रम था।

रोहतक में हुड्‌डा की भाभी के निधन पर कुमारी सैलजा और बीरेंद्र सिंह शोक प्रकट करने पहुंचे थे।

जेपी ने कुलदीप पर क्या टिप्पणी की मीडिया से बातचीत में हिसार से कांग्रेस सांसद जयप्रकाश जेपी ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि ये अपने किए हुए कर्मों पर हताश होंगे। ये 32 हजार वोट से एक निर्दलीय प्रत्याशी से हार गए थे, इसके बाद भी हुड्डा पर निशाना साधते हैं। जिनकी लोकसभा में बुरी हालत हुई, असेंबली में बुरी हालत हुई है, वो ऐसा कहते हैं, ये गलत बात है। मैं ऐसे लोगों पर ध्यान ही नहीं देता।

क्यों हुड्डा से नाराज हुए कुलदीप शर्मा…

  • बेटे को टिकट न मिलने पर पार्टी छोड़ने की चर्चा चली : करनाल लोकसभा सीट से कुलदीप शर्मा के पिता पंडित चिरंजीलाल शर्मा लगातार 4 बार सांसद रहे। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में कुलदीप अपने बेटे चाणक्य पंडित के लिए करनाल से टिकट चाहते थे। उन्होंने प्रचार भी शुरू कर दिया था। हालांकि कांग्रेस से टिकट दिव्यांशु बुद्धिराजा को मिला। इसके बाद कुलदीप नाराज हो गए थे। फिर हुड्डा से दूरी बढ़ती गई।
  • मंच से हुड्डा बोले- पंडितजी आप हमारे नेता : एक बार तो चर्चा चली थी कि कुलदीप शर्मा कांग्रेस छोड़ सकते हैं। इस नाराजगी को भांपते हुए हुड्डा ने सार्वजनिक मंच पर कुलदीप से कहा भी था-पंडित जी, आप हमारे नेता हो, आप पार्टी छोड़ने की कोशिश करें तो भी आपको जाने नहीं देंगे।
  • गन्नौर से लड़कर कादियान से हार गए : एक बार यह भी चर्चा थी कि कुलदीप शर्मा को अक्टूबर 2024 के चुनाव में सोनीपत की गन्नौर विधानसभा से कांग्रेस का टिकट नहीं मिलेगा। लेकिन लिस्ट में उनका नाम आया। हालांकि वह करीब 35 हजार वोट से चुनाव हार गए। भाजपा का टिकट न मिलने पर बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़े देवेंद्र कादियान ने यहां जीत दर्ज की थी। इसके बाद से कुलदीप शर्मा की हुड्डा से दूरी और बढ़ गई।
पिछले साल कुलदीप शर्मा के कांग्रेस छोड़ने की चर्चा चली थी, उनकी नाराजगी भांपते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मंच से उन्हें कहा था- पंडितजी छोड़कर मत जाना।

पिछले साल कुलदीप शर्मा के कांग्रेस छोड़ने की चर्चा चली थी, उनकी नाराजगी भांपते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मंच से उन्हें कहा था- पंडितजी छोड़कर मत जाना।

कुलदीप के दामाद भाजपा समर्थित सांसद कुलदीप शर्मा अम्बाला के पूर्व विधायक विनोद शर्मा के समधि हैं। कुलदीप की बेटी की शादी विनोद शर्मा के बेटे कार्तिकेय शर्मा से हुई है। जो इस समय भाजपा के समर्थन से निर्दलीय राज्यसभा सांसद हैं। जबकि समधि विनोद शर्मा की पत्नी शक्ति रानी शर्मा भाजपा के टिकट पर कालका से विधायक हैं।

अब सिलसिलेवार पढ़ें…हुड्‌डा के करीबी 3 नेताओं ने क्या कहा…

1. कुलदीप शर्मा ने कहा- नेता की बजाय पार्टी के साथ चलूंगा कुमारी सैलजा लगातार हरियाणा के दौरे कर रही हैं। हुड्‌डा से नाराज नेताओं से लगातार संपर्क बढ़ा रही हैं। कुमारी सैलजा 7 सितंबर को हुए कार्यक्रम में करनाल गई थीं, यहां हुड्‌डा कैंप के बड़े नेता कुमारी सैलजा के साथ नजर आए थे। इन नेताओं में सबसे बड़ा नाम पूर्व विधानसभा स्पीकर कुलदीप शर्मा का था जो कभी हुड्‌डा के करीबी मानते जाते थे। अब कुलदीप शर्मा कुमारी सैलजा के साथ खड़े होकर हुड्‌डा कैंप को अपनी नाराजगी और तेवर दोनों दिखा रहे हैं। हालांकि कुलदीप शर्मा का कहना है कि वह किसी नेता नहीं बल्कि पार्टी के साथ चलने में विश्वास रखते हैं।

2. संपत ने कहा था- अभय ने रोहतक में रैली कर दम दिखाया विधानसभा चुनाव में हिसार की नलवा विधानसभा से टिकट कटने से नाराज पूर्व मंत्री संपत सिंह ने हुड्‌डा का साथ छोड़ कुमारी सैलजा का पाला पकड़ लिया था। चुनाव में टिकट कटने के बाद नारनौंद रैली में वह कुमारी सैलजा के मंच पर गए थे और उनका साथ दिया था। इसके बाद से ही संपत सिंह हुड्‌डा खेमे से लगातार दूरी बनाए हुए हैं। हाल ही में वह इनेलो द्वारा आयोजित ताऊ देवीलाल जयंती पर हुई रैली में गए थे। संपत सिंह ने रैली में पहुंचकर अभय सिंह चौटाला की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि, इनेलो की कमान सही हाथों में है, क्योंकि अभय सिंह चौटाला में बहुत सुधार आया है।

3. पूर्व MLA सुमिता सिंह ने कहा था- कांग्रेस के हर नेता का स्वागत करेंगे पूर्व विधायक सुमिता सिंह की सैलजा से मुलाकात ने हुड्‌डा खेमे के टूटने का संकेत दिया था। 7 सितंबर को दोनों की मुलाकात हुई थी। इसके बाद सुमिता सिंह ने कहा था कि कांग्रेस एक परिवार की तरह है। अगर कोई नेता करनाल आता है, तो वे सब उस कार्यक्रम में शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष चाहे जो भी बने, वे उसका स्वागत करेंगी। सुमिता सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि वे हुड्डा से नाराज नहीं हैं। अगर उन्हें किसी कार्यक्रम में बुलाया जाएगा तो जरूर जाएंगी।

7 सितंबर को करनाल में हुए कुमारी सैलजा के कार्यक्रम में कांग्रेस नेता कुलदीप शर्मा व पूर्व विधायक सुमिता सिंह भी पहुंची थीं।

7 सितंबर को करनाल में हुए कुमारी सैलजा के कार्यक्रम में कांग्रेस नेता कुलदीप शर्मा व पूर्व विधायक सुमिता सिंह भी पहुंची थीं।

भूपेंद्र सिंह हुड‌्डा से किनारा करने की 4 बड़ी वजह…

  • लगातार तीन बार हार : हरियाणा में लगातार 3 बार हार का कारण कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा को मान रहे हैं। कांग्रेस से नाराज नेता बताते हैं कि तीनों चुनाव कहीं ना कहीं हुड्‌डा के नेतृत्व में लड़े गए। टिकटों का वितरण हुड्‌डा के हिसाब से हुआ, मगर तीनों ही बार हार का सामना करना पड़ा।
  • उम्र का पड़ाव : भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा 79 साल के हो गए हैं। अगला चुनाव आते-आते हुड्‌डा 83 साल के हो जाएंगे। जबकि 62 वर्षीय कुमारी सैलजा की उम्र राजनीतिक पारी खेलने के लिए काफी है। ऐसे में कांग्रेस नेता हुड्‌डा की जगह कुमारी सैलजा को आगामी राजनीति का भविष्य मान रहे हैं। उनका कहना है कि हुड्‌डा जहां एक क्षेत्र के नेता के रूप में पहचाने जाते हैं वहीं सैलजा की एक वर्ग पर मजबूत पकड़ है।
  • 90 टिकट के लिए ढाई हजार फॉर्म भरवाए: कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने चुनाव लड़ने के लिए सभी से आवेदन मांगे थे। जिन्हें टिकट नहीं मिला वे नाराज हो गए। जिनको अपनी जीत पर भरोसा था वह निर्दलीय खड़े हो गए और कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचाया। इसके लिए पार्टी के नेता हुड्‌डा को ही जिम्मेदार बताते हैं।
  • दीपेंद्र हुड्‌डा को आगे करना : कांग्रेस नेता इस बात से भी नाराज हैं कि भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा ने अपने बेटे को चुनावी कैंपेन में आगे रखा। इससे प्रदेश में एक ही जाति वर्ग के नेता के रूप में हुड्‌डा की छवि बनती चली गई। इससे दूसरे वर्ग के नेता, वर्कर हताश हो गए। वोटरों में भी गलत मैसेज गया। जिसके कारण कांग्रेस की हार हुई। वर्करों में मैसेज गया कि कांग्रेस एक परिवार की पार्टी बनकर रह गई है।



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