बिहार में महिलाओं की बच्चेदानी की कीमत 20 हजार: बिना बीमारी ऑपरेशन, भास्कर के कैमरे पर डॉक्टर बोले- कितनी भी लाओ, हर मरीज पर 4000 देंगे – Bihar News

बिहार में महिलाओं की बच्चेदानी की कीमत 20 हजार: बिना बीमारी ऑपरेशन, भास्कर के कैमरे पर डॉक्टर बोले- कितनी भी लाओ, हर मरीज पर 4000 देंगे – Bihar News

बिहार में महिलाओं की बच्चेदानी की कीमत 20 हजार:  बिना बीमारी ऑपरेशन, भास्कर के कैमरे पर डॉक्टर बोले- कितनी भी लाओ, हर मरीज पर 4000 देंगे – Bihar News

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पश्चिमी चंपारण की रहने वाली भागमनी को पेट में दर्द रहता था। डॉक्टर के पास गईं तो, उन्होंने अपेंडिक्स का इलाज कर दिया। आराम तो हुआ, लेकिन मर्ज खत्म नहीं हुआ।

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भागमनी ने गांव की एक महिला हेल्थ वर्कर से बात की। उसने बेहतर इलाज की बात कहकर 12 दिसंबर, 2024 को भागमनी को यूपी के कुशीनगर में एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया।

भागमनी का आरोप है कि डॉक्टरों ने यूट्रस यानी बच्चेदानी का इन्फेक्शन बताकर डरा दिया। हॉस्पिटल ने 16 दिसंबर, 2024 को आयुष्मान कार्ड लेकर उनका यूट्रस निकाल दिया।

28 साल की भागमनी अकेली नहीं हैं, बिहार में सिर्फ 20 हजार रुपए के लिए डॉक्टर बिना किसी बड़ी बीमारी के महिलाओं की बच्चेदानी निकाल रहे हैं।

दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और देखिए आयुष्मान के पैसे के लिए कैसे हॉस्पिटल महिलाओं की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। इस खेल में प्राइवेट हॉस्पिटल के अलावा, आशा वर्कर, झोलाछाप डॉक्टर, मेडिकल स्टोर वाले और सरकारी हॉस्पिटल के कर्मचारी भी शामिल हैं…

20 हजार का पैकेज, 4 हजार एजेंट का कमीशन, बाकी पैसा हॉस्पिटल का

आयुष्मान योजना में बच्चेदानी की सर्जरी के लिए 20 हजार रुपए मिलते हैं। प्राइवेट हॉस्पिटल में एक सर्जरी पर 5 से 6 हजार रुपए खर्च आता है। 4 हजार रुपए एजेंट को देने के बाद हॉस्पिटल 10 हजार रुपए बचा रहे हैं।

बिहार में 40 साल से कम उम्र की महिलाओं की बच्चेदानी निकालने के लिए 6 महीने तक ट्रीटमेंट की मेडिकल हिस्ट्री के साथ सरकारी मेडिकल सेंटर से गाइनी सर्जन की ओपिनियन का नियम है। इसलिए कमीशन के लिए एजेंट बिहार की महिलाओं का यूपी में ऑपरेशन करा रहे हैं।

यूपी-बिहार के 10 जिलों के 30 हॉस्पिटल की पड़ताल

कमीशन और गलत सर्जरी कर पैसे कमाने का खेल उजागर करने के लिए दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने यूपी-बिहार के 10 जिलों पश्चिमी चंपारण, सीवान, गोपालगंज, छपरा, बक्सर, कुशीनगर, देवरिया, गाजीपुर, मऊ और गोरखपुर में 30 से ज्यादा हॉस्पिटल को स्कैन किया।

इसके बाद भास्कर रिपोर्टर हॉस्पिटल संचालक बने और 10 से ज्यादा अस्पतालों में गए। सभी ने आयुष्मान कार्ड पर कमीशन और यूट्रस की सर्जरी की डील की।

हमारी टीम ने ये सब कैमरे में रिकॉर्ड किया है। हम एजेंट और डॉक्टर से लेकर पीड़ित महिलाओं तक भी पहुंचे। बच्चेदानी निकालने के आरोपों की पड़ताल के लिए महिलाओं का अल्ट्रासाउंड भी कराया।

पीड़ित महिलाओं के आरोप और उसकी पड़ताल

पहला आरोप भागमनी का

बच्चेदानी निकाली, डिस्चार्ज रिपोर्ट में अपेंडिक्स की सर्जरी का जिक्र

पश्चिमी चंपारण के मधुबनी की रहने वाली भागमनी दिव्यांग हैं। उनके पति धर्मेंद्र भी चल नहीं पाते। भागमनी बताती हैं, ‘8 महीने पहले मेरे पेट में तेज दर्द हुआ। इलाज के लिए बगहा के एक प्राइवेट अस्पताल गई। डॉक्टरों ने कहा- अपेंडिक्स है।

इलाज से थोड़ा आराम मिल गया। गांव की एक महिला हेल्थ वर्कर ने मुझसे कहा कि यूपी के कुशीनगर में एक अस्पताल है, वहां अच्छा इलाज होता है। 12 दिसंबर, 2024 को उसने मुझे अस्पताल में भर्ती करा दिया।

भागमनी का आरोप है कि डॉक्टरों ने बच्चेदानी का संक्रमण बताकर परिवार वालों को डरा दिया। 16 दिसंबर 2024 को हॉस्पिटल ने आयुष्मान कार्ड लेकर बच्चेदानी निकाल दी।

भागमनी एक और आरोप लगाती हैं कि आयुष्मान कार्ड के बाद भी अस्पताल वालों ने हमसे 25 हजार रुपए लिए। भागमनी ने हमें डिस्चार्ज पेपर दिखाया। इसमें बच्चेदानी की बजाय अपेंडिक्स की सर्जरी का जिक्र है।

हमने भागमनी के आरोपों की पड़ताल के लिए उनका अल्ट्रासाउंड कराया। रिपोर्ट में ‘यूट्रस इज सर्जिकली रिमूव’ बताया गया।

दूसरा आरोप रीना का

डॉक्टरों ने कहा- मर जाओगी, डराकर बच्चेदानी निकाल दी

पश्चिमी चंपारण की रहने वाली 27 साल की रीना को पीरियड्स की समस्या थी। गांव में इलाज कराया, लेकिन आराम नहीं मिला। रीना बताती हैं, ‘गांव की महिला हेल्थ वर्कर की सलाह पर मैं पास के हरनाटाड़ में एक प्राइवेट अस्पताल चली गई।’

रीना का आरोप है, हॉस्पिटल से कुछ लोगों ने यूपी के कुशीनगर में एक प्राइवेट हॉस्पिटल भेज दिया। कुशीनगर में डॉक्टरों ने बच्चेदानी की बीमारी बताकर तुरंत ऑपरेशन के लिए कहा। हमारे पास पैसा नहीं था। हमने ऑपरेशन के लिए वक्त मांगा।

डॉक्टरों ने सीरियस इन्फेक्शन बताकर ऑपरेशन का दबाव बनाया। घरवाले इतना डर गए कि मेरी जान बच जाए, इसलिए ऑपरेशन के लिए राजी हो गए। अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड लिया और बच्चेदानी निकाल दी।

रीना के आरोपों की जांच के लिए दैनिक भास्कर ने उनका अल्ट्रासाउंड कराया। इस रिपोर्ट में भी ‘यूट्रस इज सर्जिकली रिमूव’ बताया गया।

भास्कर रिपोर्टर ने रीना के आरोपों की जांच के उनका अल्ट्रासाउंड कराया।

भास्कर रिपोर्टर ने रीना के आरोपों की जांच के उनका अल्ट्रासाउंड कराया।

अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में बताया गया ‘यूट्रस इज सर्जिकली रिमूव’

अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में बताया गया ‘यूट्रस इज सर्जिकली रिमूव’

तीसरा आरोप विद्यावती का

इलाज शुरू किए बिना ही सर्जरी कर दी

पश्चिमी चंपारण की रहने वाली 28 साल की विद्यावती का आरोप है, ‘गंभीर संक्रमण बताकर उनकी भी बच्चेदानी निकाल दी गई। विद्यावती बताती हैं, ‘मुझे व्हाइट डिस्चार्ज हो रहा था। गांव के पास ही प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करा रही थी।’

उनका आरोप है कि गांव की एक महिला हेल्थ वर्कर ने मुझे यूपी के पड़रौना में एक प्राइवेट हॉस्पिटल पहुंचा दिया। यहां इलाज करने के बजाए सीधे सर्जरी कर दी गई। बीमा कार्ड के अलावा भी पैसे लिए। हमने विद्यावती का अल्ट्रासाउंड कराया, जिसमें ‘यूट्रस इज सर्जिकली रिमूव’ की रिपोर्ट आई।

आयुष्मान योजना के कमीशन में 4 हिस्सेदार

पीड़ित महिलाओं से बातचीत करते हुए समझ आया कि मरीजों को हॉस्पिटल ले जाने के इस खेल में गांव की आशा वर्कर्स से लेकर मेडिकल स्टोर वाले भी शामिल हैं। इनका रोल भी जान लीजिए…

  • 1. आशा वर्कर : इनकी प्राइवेट अस्पतालों से सेटिंग होती है। ये गांव में ऐसी महिलाओं पर नजर रखती हैं, जिन्हें पेट की समस्या हो। कमीशन के चक्कर में वे महिलाओं को प्राइवेट हॉस्पिटल पहुंचाने की कड़ी बनती हैं।
  • 2. सरकारी अस्पतालों का स्टाफ : सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले हेल्थ वर्कर मरीजों पर नजर रखते हैं। बेहतर इलाज की बात कहकर उन्हें प्राइवेट अस्पताल भेज देते हैं। बदले में हॉस्पिटल से कमीशन लेते हैं।
  • 3. झोलाछाप डॉक्टर और मेडिकल स्टोर वाले : यूपी-बिहार के बॉर्डर वाले जिलों के झोलाछाप डॉक्टर, मेडिकल स्टोर वाले, छोटे क्लिनिक चलाने वाले कमीशन पर मरीजों को निजी अस्पताल भेजते हैं।
  • 4. कमीशन पर काम करने वाले एजेंट : गांवों में अस्पताल अपने एजेंट रखते हैं। वे कमीशन पर मरीजों को हॉस्पिटल पहुंचा देते हैं। सर्जरी वाले ज्यादातर मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में भेजते हैं। आयुष्मान कार्ड वाले मरीज उनके टारगेट पर होते हैं।

कमीशन के लिए डॉक्टरों की डील कैमरे पर

महिलाओं की बिना बीमारी यूट्रस निकालने और अस्पातल का खेल एक्सपोज करने के लिए अब भास्कर टीम ने डॉक्टर-हॉस्पिटल चलाने वालों से डील शुरू की। आयुष्मान योजना के सख्त नियमों के बाद भी इन लोगों ने इलाज पर कमीशन लेने और 40 साल से कम उम्र की महिलाओं की बच्चेदानी निकालने का दावा कैसे किया।

भास्कर रिपोर्टर बिहार का हॉस्पिटल संचालक बनकर न्यू जीवन हॉस्पिटल पहुंचा। ये हॉस्पिटल गोरखपुर के ट्रांसपोर्ट नगर में है। हम हॉस्पिटल के एमडी डॉ. विकास राय से मिले। उन्होंने बच्चेदानी की सर्जरी के लिए 4 हजार रुपए कमीशन देने की बात कही। आयुष्मान योजना में इलाज पर कमीशन की भी डील की। पढ़िए पूरी बातचीत…

रिपोर्टर- बिहार में हमारा रेफरल हॉस्पिटल है। आप एजेंट को आयुष्मान योजना पर कितना कमीशन देते हैं? डॉ. विकास राय- अभी आयुष्मान वाले मरीजों को कहां भेजते हैं?

रिपोर्टर- पड़रौना और कुशीनगर भेजते हैं, लेकिन पैसा बहुत कम मिलता है। डॉ. विकास राय- ब्लेडर में स्टोन और यूट्रस पर क्या मिल रहा है?

रिपोर्टर- अभी तो एक हजार रुपए मिल रहे हैं। डॉ. विकास राय- बहुत कम है, हम आयुष्मान के मरीजों पर 3 से 4 हजार रुपए कमीशन दे देंगे।

रिपोर्टर- आयुष्मान से बच्चेदानी की सर्जरी पर क्या कमीशन देते हैं? डॉ. विकास- बच्चेदानी की सर्जरी पर 4 हजार रुपए कमीशन देते हैं।

गोरखपुर के न्यू जीवन हॉस्पिटल के एमडी डॉ. विकास राय ने हमें कहा, किसी भी उम्र की महिला की बच्चेदानी निकाल देंगे। आप बस ले आइए।

गोरखपुर के न्यू जीवन हॉस्पिटल के एमडी डॉ. विकास राय ने हमें कहा, किसी भी उम्र की महिला की बच्चेदानी निकाल देंगे। आप बस ले आइए।

रिपोर्टर- 40 साल से कम उम्र की महिला की बच्चेदानी निकालना क्राइम है। आप कैसे करेंगे? डॉ. विकास राय- सख्ती तो है, लेकिन हो जाएगा। 40 साल से कम उम्र में भी हो जाएगा।

रिपोर्टर- आयुष्मान योजना में किस मर्ज पर कितना कमीशन देंगे, पैसा कब तक देते हैं? डॉ. विकास राय- मरीज की छुट्‌टी पर पैसा मिल जाएगा। सर्जरी के हर केस पर लगभग 3 से 4 हजार दे देंगे।

रिपोर्टर- बिहार में बच्चेदानी का बहुत केस है? डॉ. विकास- भेजिए कोई दिक्कत नहीं, हमारे यहां 70 प्रतिशत बिहार के मरीज हैं।

रिपोर्टर- आप एमबीबीएस हैं, खुद सर्जरी करते हैं? डॉ. विकास- नहीं मैं बीयूएमएस हूं, मैनेजमेंट देखता हूं। मरीज भेजिए हर केस में अच्छा कमीशन देंगे।

भास्कर रिपोर्टर हॉस्पिटल संचालक बनकर रचित हॉस्पिटल पहुंचा। ये हॉस्पिटल गोरखपुर के दाउदपुर में है। रचित नाम से दो हॉस्पिटल हैं, दोनों में आयुष्मान योजना का काम शाहिद देखते हैं। हमारी मुलाकात शाहिद से कराई गई। उन्होंने बच्चेदानी की सर्जरी के लिए 3 हजार रुपए कमीशन देने की बात कही। एक दो नहीं 10 से 15 केस एक साथ भेजने की बात कही। पढ़िए पूरी बातचीत…

रिपोर्टर – आयुष्मान के मरीजों पर आप कितना देते हैं? शाहिद – अलग-अलग रेट है, जैसा पैकेज होता है, वैसा कमीशन देते हैं।

रिपोर्टर – कब मिलता है पैसा? शाहिद – डॉ. मैडम की बैठक हर माह होती है, इसके बाद कमीशन का पैसा जाता है।

रिपोर्टर – आयुष्मान के मरीजों को यहां भेजने से फायदा होगा ना? शाहिद – आयुष्मान का केस दीजिए, आपको बहुत फायदा होगा।

रिपोर्टर – बच्चेदानी वाली सर्जरी का क्या कमीशन है, उम्र काे लेकर कोई दिक्कत? शाहिद – 3000 रुपए देते हैं, उम्र के लिए पेशेंट को आप मैनेज कर लीजिएगा, सब हो जाएगा।

गोरखपुर के रचित हॉस्पिटल में शाहिद ने हमसे कहा- आयुष्मान वाला केस लाइए, खूब कमाई है।

गोरखपुर के रचित हॉस्पिटल में शाहिद ने हमसे कहा- आयुष्मान वाला केस लाइए, खूब कमाई है।

रिपोर्टर – बच्चेदानी की सर्जरी का एक साथ दो-तीन केस भेज सकते हैं क्या? शाहिद – एक-दो नहीं, एक साथ 10 से 15 केस दीजिए, कोई दिक्कत नहीं। आप पेशेंट देंगे, हम कमीशन देंगे।

रिपोर्टर – सर्जरी कौन करता है? शाहिद – मैम, डॉ. रश्मि राय ही करती हैं, सारा हिसाब किताब भी वही देखती हैं।

रिपोर्टर – आयुष्मान का पूरा मामला आप ही देखते हैं? शाहिद – जी हां, दोनों सेंटर का मैं ही देखता हूं।

रिपोर्टर – कमीशन फंसेगा तो नहीं? शाहिद – निश्चिंत रहिए, मैडम सारा कुछ खुद देखती हैं। जिसका जितना होता है, मैम फाइनल करती हैं।

रिपोर्टर – बच्चेदानी का केस अधिक दें तो, कमीशन बढ़ेगा क्या? शाहिद – पहले आप जुड़िए, पेशेंट जितना दीजिए आपको फायदा होगा। यहां आपके नाम से पूरा डिटेल होगा।

सिटी हब हॉस्पिटल में हमारी बात डॉ. फैयाज से हुई। उन्होंने दावा किया कि एजेंट को मैनेज करने के लिए बिहार में PRO तैनात किए हैं। जगह-जगह एंबुलेंस भी लगाई हैं।

रिपोर्टर- आयुष्मान के मरीजों के लिए आप कितना कमीशन देते हैं? डॉ. फैयाज – सर्जरी के केस में 4 से 5 हजार रुपए कमीशन दे देते हैं।

रिपोर्टर- बच्चेदानी की सर्जरी हो जाएगी, आयुष्मान पर कितना दे देंगे? डॉ. फैयाज – हां, हो जाएगी, हम 4 हजार रुपए कमीशन दे देंगे। पथरी के केस में 5 हजार देंगे।

रिपोर्टर- पैसा कब देंगे, हिसाब के लिए हॉस्पिटल आना होगा क्या? डॉ. फैयाज – मरीज की छुट्‌टी होते ही पैसा UPI (ऑनलाइन ट्रांजैक्शन) कर दिया जाएगा।

रिपोर्टर- आयुष्मान का पैसा तो लेट आता है? डॉ. फैयाज- नहीं, हम इलाज के साथ दे देंगे। आप लोगों की सुविधा के लिए बिहार में PRO भी रखे हैं। वहां अपनी एंबुलेंस भी हमेशा रहती है।

पड़रौना के जीवन रक्षक हॉस्पिटल में हमारी मुलाकात डायरेक्टर परवेज अली से हुई। आयुष्मान योजना से 40 साल से कम उम्र की महिला की बच्चेदानी निकालने और 4 हजार कमीशन का दावा किया।

रिपोर्टर- आयुष्मान से बच्चेदानी की सर्जरी होती है? परवेज अली – हमारे यहां आयुष्मान योजना में सभी तरह की सर्जरी होती है।

रिपोर्टर – बच्चेदानी की सर्जरी पर कितना कमीशन देते हैं? परवेज अली- बच्चेदानी के केस में 3 हजार रुपए देते हैं। पथरी में भी 3 हजार दे देंगे।

रिपोर्टर- बिहार में बच्चेदानी की सर्जरी में उम्र को लेकर दिक्कत आती है, पुलिस केस हो जाता है। परवेज अली- कोई दिक्कत नहीं, यहां मरीज भेजिए, सब हो जाएगा। हम लोग डील कर लेंगे।

आयुष्मान में इलाज के नाम पर कमीशन के खेल में सरकारी कर्मचारी और हेल्थ वर्कर कैसे काम कर रहे हैं, इसकी पड़ताल के लिए भास्कर रिपोर्टर हॉस्पिटल संचालक बनकर पश्चिमी चंपारण में पतिलार के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा। यहां ब्लॉक कम्युनिटी ऑफिसर अश्विनी सिंह ने कमीशन पर मरीज भेजने का दावा किया।

रिपोर्टर- यूपी में अपना हॉस्पिटल है, आप मरीज कहां भेजते हैं? अश्विनी- मेरे अंडर में 300 आशा हैं, मरीज का फिक्स नहीं हैं।

रिपोर्टर- आप हमारे हॉस्पिटल में मरीज भेजिए, आपका फायदा होगा। अश्विनी- 50% कमीशन दीजिए, तो मैं आशा को सेट कर दूंगा।

रिपोर्टर- केस पथरी वाला ही दीजिएगा? अश्विनी- केस नहीं भी होगा तो बना दिया जाएगा। हम हॉस्पिटल से फर्जी रिपोर्ट बनवा देंगे।

रिपोर्टर- आपके तो सब परिचित ही होंगे? अश्विनी- हां, हम अपने हॉस्पिटल से ही पर्चा बनवा लेंगे। आप 50% दीजिए, सब सेट हो जाएगा।

रिपोर्टर- आशा तो मरीज भेजती होंगी न? अश्विनी- हां, लेकिन हॉस्पिटल फिक्स नहीं हैं। अगर आप 50% दीजिएगा, तो सब आपके यहां भेजेंगी।

पश्चिमी चंपारण में पतिलार के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ब्लॉक कम्युनिटी ऑफिसर अश्विनी सिंह ने कमीशन पर मरीज भेजने का दावा किया।

पश्चिमी चंपारण में पतिलार के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ब्लॉक कम्युनिटी ऑफिसर अश्विनी सिंह ने कमीशन पर मरीज भेजने का दावा किया।

बिहार की महिलाओं में बच्चेदानी की समस्या कॉमन

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे- 5 के मुताबिक, बिहार में 15 से 49 साल की 63.6% महिलाएं कुपोषित हैं। ज्यादा समस्या गर्भवती महिलाओं में है। 63.5% महिलाओं को एनीमिया की समस्या है।

फिजीशियन डॉ. राणा एसपी सिंह बताते हैं कि महिलाओं में पीरियड और व्हाइट डिस्चार्ज की समस्या होती है। गांव की महिलाएं इस पर खुलकर नहीं बता पातीं। वे गांव की हेल्थ वर्कर के चक्कर में फंस जाती हैं। परिवार भी इस बारे में नहीं जानता। इसलिए दवा से ठीक होने वाली बीमारी में भी बच्चेदानी निकाल दी जाती है।

यूपी से सटे जिलों में सर्जरी का ट्रेंड

यूपी से सटे बिहार के पश्चिमी चंपारण (बगहा) के रामनगर में 8 नवंबर 2022 को ओम साईं हॉस्पिटल ने 11 महिलाओं काे संक्रमण का डर बताकर बच्चेदानी निकाल दी थी। इसमें 7 महिलाओं की उम्र 40 साल से भी कम थी। हर महिला से 27 हजार रुपए लिए गए।

जिला प्रशासन ने अस्पताल सील कर डॉक्टर के खिलाफ FIR कराई थी। घटना के 14 दिन बाद 22 नवंबर 2022 को पश्चिमी चंपारण के ही भैरोगंज में एक निजी हॉस्पिटल ने बिना अनुमति 4 महिलाओं का यूट्रस निकाल दिया। इसका खुलासा सिविल सर्जन की जांच में हुआ था।

इलाज के नाम पर स्कैम

14 साल पहले 27 हजार महिलाओं की बच्चेदानी निकाली

2011 में केंद्र सरकार ने नेशनल हेल्थ बीमा स्कीम लागू की थी। इसके तहत गरीबी रेखा के नीचे जीने वाले परिवार को 30 हजार रुपए का इलाज मुफ्त किया जाना था। बिहार में इसके लिए 350 अस्पतालों को चुना गया। इन अस्पतालों में बीमा सुरक्षा देने के नाम पर गरीब महिलाओं की बच्चेदानी निकाल दी।

2012 में इसका खुलासा हुआ। तब समस्तीपुर के डीएम रहे कुंदन कुमार ने एक शिकायत पर जांच कराई थी। शहर के पटेल मैदान में एक कैंप लगवाकर महिलाओं की जांच कराई गई। सिर्फ समस्तीपुर में 316 केस मिले, जिनके महिलाओं की बच्चेदानी बेवजह निकाल दी गई थी।

पूरे बिहार में ऐसे 27 हजार केस मिले। इसे यूट्रस घोटाला कहा गया। सरकार ने सभी महिलाओं को 50 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था।

ऑपरेशन यूट्रस पार्ट-2 में कल देखिए कैसे इंडो-नेपाल बॉर्डर पर झोलाझाप डॉक्टर अनमैरिड लड़कियों के यूट्रस निकाल रहे हैं।

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