जैसलमेर और बीकानेर…ये रियासतें ऐसी हैं, जहां मराठा कभी चौथ वसूली नहीं कर पाए थे। इसके बावजूद नक्शे में इसे मराठा साम्राज्य में दिखाया गया है।
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NCERT की 8वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब में छपे नक्शे पर राजस्थान के इतिहासकार इसी तरह के सवाल उठा रहे हैं। किताब में राजस्थान की सभी 19 रियासतों को मराठा साम्राज्य में दिखाया गया है।
इस पर मेवाड़, जैसलमेर सहित कुछ रियासतों के पूर्व राजपरिवारों के सदस्यों ने आरोप लगाया गया है कि बिना ऐतिहासिक तथ्यों-प्रमाणों के ये नक्शा छापा गया है।
क्या ये कोई राजनीतिक एजेंडा तो नहीं है? NCERT की किताब में यह नक्शा आया कहां से? क्या पहले भी कभी ऐसा हुआ है? भास्कर टीम ने ऐसे ही सवालों के जवाब राजस्थान के इतिहासविद कुंवर अमित सिंह और विजय भारद्वाज से बात कर लिए। पढ़िए ये रिपोर्ट
सवाल : NCERT की किताब में कौनसा नया दावा किया गया है, जिस पर विवाद खड़ा हुआ?
जवाब : नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की किताब में एक मैप प्रकाशित हुआ है, जिसमें जैसलमेर, मेवाड़ और बूंदी समेत राजस्थान के कई हिस्सों को मराठा साम्राज्य का हिस्सा बताया गया है।
ये मैप NCERT की 8वीं की सामजिक विज्ञान (सोशल साइंस) की किताब में प्रकाशित हुआ है। इसे लेकर राजस्थान में विवाद गहराता जा रहा है।
विरोध करने वालों का कहना है कि ऐतिहासिक प्रमाणों में कहीं भी इन रियासतों पर मराठा प्रभुत्व, कराधान या प्रशासनिक नियंत्रण का कोई प्रमाण नहीं है।
नक्शे में मराठा साम्राज्य को कोल्हापुर से उत्तर में पेशावर और कटक तक दर्शाया है। इसमें जैसलमेर को भी मराठा साम्राज्य में दिखाया गया है।
सवाल : कौन-कौन सी रियासतों को मराठा साम्राज्य का हिस्सा दिखाया गया है?
जवाब : इस किताब में राजस्थान की सबसे पुरानी रियासत मेवाड़, सबसे बड़ी रियासत जोधपुर सहित सभी 19 रियासतों और तीन ठिकानों (लावा, कुशलगढ़ और नीमराना) को मराठा साम्राज्य का हिस्सा दिखाया गया है। एक्सपर्ट्स के अनुसार ये तथ्य कतई सही नहीं हैं।
इतिहासकार जे.के. ओझा के अनुसार मराठाओं का राजस्थान में पहला प्रवेश 1711 में मेवाड़ क्षेत्र से हुआ था। इतिहासकार जे.एन. सरकार के अनुसार 1724 में बूंदी के उत्तराधिकार विवाद के समय मराठाओं ने हस्तक्षेप से वास्तविक रूप से राजस्थान में प्रवेश किया था।
इसके बाद मराठाओं ने कोटा, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, जोधपुर, आमेर रियासतों में वसूली की। लेकिन जैसलमेर और बीकानेर रियासतों में मराठाओं ने कभी प्रवेश नहीं किया।

विवाहित नक्शा 8वीं क्लास की इसी पुस्तक में दिया गया है।
सवाल : इस नक्शे पर राजस्थान के किन-किन पूर्व राजघरानों ने आपत्ति जताई है?
जवाब : इस नक्शे को लेकर खासतौर पर राजस्थान के 4 पूर्व राजघरानों के 5 सदस्यों ने आपत्ति जताई है। मेवाड़ के पूर्व राजघराने के सदस्य और भाजपा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़, उनकी पत्नी व राजसमंद से भाजपा सांसद महिमा कुमारी भी इस विरोध में शामिल हैं।
वहीं, जैसलमेर के पूर्व राजघराने के प्रमुख चैतन्य राज सिंह भाटी, बूंदी के पूर्व राजघराने के सदस्य ब्रिगेडियर भूपेश सिंह हाड़ा ने एनसीईआरटी के शिक्षाविदों और इस किताब के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
इन सभी पूर्व राज परिवार के सदस्यों ने इस किताब में दर्ज संबंधित जानकारी को लेकर उनके पूर्वजों के बलिदान को धूमिल करने के प्रयास के आरोप लगाए हैं।
सवाल : इतिहासकार और राजनीतिक विश्लेषक इस विवाद को कैसे देख रहे हैं?
जवाब : एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतिहास के तथ्यों से छेड़छाड़ को सही नहीं ठहराया जा सकता। अब इस किताब को तैयार करने के लिए ये तथ्य कहां से लिए गए हैं, यह भी स्पष्ट नहीं है।
यदि किसी जगह से तथ्य उठाया भी जाएं, तो वेरिफाई भी करना जरूरी है। किसी क्षेत्र को इस प्रकार से दिखाना संबंधित क्षेत्र की अस्मिता के खिलाफ है। विभिन्न राजपरिवारों से जुड़े सक्रिय राजनेताओं द्वारा इसका विरोध किया गया है, क्योंकि इसका ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है…




सवाल : क्या वाकई मराठा साम्राज्य का प्रभाव इन रियासतों पर था? इतिहास में क्या प्रमाण हैं?
जवाब : उस समय कुछ राज्यों पर मराठों का प्रभाव था जिन पर उनके द्वारा आक्रमण किए गए और उन राज्यों से चौथ (एक प्रकार का कर) वसूल किया गया, लेकिन ये एक छोटे समय की प्रकिया थी।
मराठाओं ने राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, उड़ीसा तक चौथ वसूली या कर वसूली के लिए युद्ध (छापामारी) किए। लेकिन इन राज्यों के किसी भी क्षेत्र पर राजनीतिक प्रभुत्व या अधिकार नहीं जमाया।
मराठों के आक्रमण का मुख्य उद्देश्य वसूली ही रहा है। इस कारण मैप में उन जगहों को प्रभाव क्षेत्र के तौर पर दिखाना बिल्कुल भी सही नहीं है। ऐतिहासिक साक्ष्य बताते हैं कि मराठों का राजस्थान में प्रभाव छापेमारी तक सीमित था।
प्रभुत्व या विस्तार का तो सवाल ही नहीं उठता! इतिहास को धार्मिक या क्षेत्रीय आधार पर तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना तथ्यों को मिथक में बदल देता है।
एक्सपर्ट का कहना है कि NCERT में की गई यह गलती राजस्थान के शूरवीर शासकों की वीरता, स्वतंत्रता, और सांस्कृतिक योगदान को कमजोर करने की कोशिश है।

जैसलमेर पूर्व राजपरिवार के सदस्य विक्रम सिंह नाचना ने भी सरकार से NCRT की किताब में दिए गए तथ्यों को ठीक करने की गुजारिश की है।
सवाल : मराठा साम्राज्य का ऐतिहासिक विस्तार किन सीमाओं तक था?
जवाब : मराठा साम्राज्य का मुख्यत: महाराष्ट्र, गुजरात के साथ मध्य प्रदेश के भागों तक विस्तार था। समय-समय पर राजपूताना (राजस्थान) के राज्यों पर चौथवसूली या टैक्स वसूली के लिए इनके आक्रमण होते रहे।
मराठों के बार-बार आक्रमणों के कारण ही सुरक्षा के लिए राजस्थान की रियासतों ने ईस्ट इंडिया कंपनी से सहायक संधियां की थी। कंपनी ने संबंधित रियासतों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली और धीरे-धीरे अलग-अलग क्षेत्रों में सैनिक छावनियां बना दी गईं।
सवाल : क्या यह नक्शा NCERT की पहले की किताबों में भी था या यह नया जोड़ा गया है?
जवाब : एक्सपर्ट्स के अनुसार ऐसा कोई नक्शा अब तक NCERT की पुरानी किताबों में नहीं था। यह पहली बार ही देखने में आया है। इसे नया ही जोड़ा गया है।
सवाल : इस विवाद के पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा है क्या?
जवाब : एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ये राजनीतिक एजेंडा हो सकता है। राजपूताना के इतिहास को कमतर करके मराठा इतिहास को बढ़ा चढ़ाकर बताना, ये बिना किसी एजेंडे के बिना संभव नहीं है।
पहले भी ऐसा हो चुका है, जिसमें राजपूताना इतिहास को कमतर बताकर मुगल इतिहास को बढ़ावा दिया गया था। वह भी एक तरह का राजनीतिक एजेंडा ही चलाया गया, जिस पर आज तक विवाद जारी है।

इतिहास के अनुसार- मुगल भी जैसलमेर को नहीं जीत पाए थे। जैसलमेर की स्थापना साल 1178 के लगभग यदुवंशी भाटी के वंशज रावल-जैसल ने की थी।
सवाल : इस पूरे मामले में किसकी गलती है?
जवाब : एक्सपर्ट्स के अनुसार इस मामले में ही नहीं, बल्कि ऐसे संवेदनशील मामलों में NCERT के विषय विशेषज्ञों को खास ध्यान देना चाहिए। ये गलती किसकी है ये तो जांच का विषय रहेगा, जो सरकार के चाहने पर ही हो सकती है।
इतना कहा जा सकता है कि किसी वंश, क्षेत्र, समाज विशेष की प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए अन्य राज्यों के इतिहास से छेड़-छाड़ नहीं होनी चाहिए। इससे अन्य राज्यों के लोग आहत होते हैं और संबंधित पूर्व राजघरानों की प्रतिष्ठा को आंच आती है।
सवाल : क्या NCERT की ओर से अब तक कोई सफाई या प्रतिक्रिया आई है?
जवाब : फिलहाल NCERT की ओर से कोई प्रतिक्रिया या सफाई सामने नहीं आई है।
सवाल : क्या NCERT या शिक्षा मंत्रालय ने इस पर कोई कदम उठाया है?
जवाब : अभी राजस्थान में चारों ओर से केवल विरोध के स्वर ही उठ रहे हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार NCERT को चाहिए कि इस पर जल्द से जल्द ध्यान देकर कन्फ्यूजन की स्थिति को दूर करना चाहिए। ऐसा सही तथ्यों के आधार पर ही संभव है।

विवादित नक्शे को लेकर अभी तक एनसीईआरटी ने कोई स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है।
सवाल : इस विवाद का छात्रों और शिक्षा व्यवस्था पर क्या असर हो सकता है?
जवाब : इस प्रकार के विवादों का शिक्षा और छात्रों पर काफी गहरा प्रभाव पड़ता है। गलत जानकारी छात्र को असमंजस की स्थितियों में ले जाती है।
वहीं शिक्षा व्यवस्था (पढ़ाई) भी पूरे देश में एक जैसी नहीं चल पाती। इससे अलग-अलग समाज भी प्रभावित होते हैं। एक क्षेत्र एक समाज के योद्धाओं को लेकर मन में भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
सवाल : NCERT की किताबें कैसे तैयार होती हैं, इनकी समीक्षा कौन करता है?
जवाब : NCERT की स्थापना 27 जुलाई, 1961 को हुई थी। इसका उद्देश्य देश में एक समान शैक्षिक पाठ्यक्रम मानक तैयार करना है।
किताबें शिक्षा विशेषज्ञों की एक समिति द्वारा विकसित राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे या नेशनल सिलेबस फॉर्मेट (NCF) के आधार पर तैयार की जाती हैं।
NCF की टीम में कुल 12 सदस्य हैं। NCF टीम में शिक्षाविद, विषय विशेषज्ञ और अन्य क्षेत्रों के विषय पर पकड़ रखने वाले लोग शामिल होते हैं।
पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए सबसे पहले NCF की ओर से एक डॉक्यूमेंट तैयार किया जाता है। ये डॉक्यूमेंट विभिन्न कक्षाओं और विषयों के लिए शैक्षिक सामग्री तैयार करने को लेकर मार्गदर्शन करता है।
पाठ्यक्रम तैयार करते समय भाषा और चित्र या रेखाचित्र का डिजाइन भी तैयार किया जाता है। इससे छात्रों को विषय समझने में आसानी हो जाती है। समिति तैयार की गई पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा भी करती है, जिससे किताबें अगले शिक्षा सत्र के लिए अपडेट हो सके।

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