14 मिनट पहले

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ओडिशा के पुरी में 19 जुलाई को 15 साल की नाबालिग लड़की पर तीन लोगों ने पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी।

ओडिशा में 15 साल की लड़की को जिंदा जलाने के मामले में उपमुख्यमंत्री केवी सिंह देव ने रविवार को कहा- विपक्षी दल इस मामले में राजनीति न करें। राज्य सरकार ने पीड़ित को बचाने की हर संभव कोशिश की थी। उसे दिल्ली AIIMS हॉस्पिटल में भी भेजा गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।

बीजू जनता दल (BJD) का आरोप है कि राज्य की भाजपा सरकार अपराधियों को बचा रही है। पुलिस ने पहले बताया कि घटना में 3 लोग शामिल थे। जब लड़की की मौत हो गई तो अब कह रही कि इसमें कोई शामिल नहीं था। घटना के लिए अकेली लड़की ही जिम्मेदार थी।

ओडिशा के बायाबर गांव में 19 जुलाई को कुछ लोगों ने 15 साल की एक लड़की को जिंदा जला दिया था। दिल्ली AIIMS में रविवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। लड़की को गंभीर हालत में पहले भुवनेश्वर और फिर दिल्ली AIIMS में भर्ती कराया गया था।

घटना स्थल की फोटो। इसे पुलिस ने काली पॉलिथीन से कवर कर दिया था।

घटना स्थल की फोटो। इसे पुलिस ने काली पॉलिथीन से कवर कर दिया था।

पिता बोले- कोई दोषी नहीं, सरकार ने मदद की पीड़ित के पिता ने रविवार को कहा कि मैं किसी को दोष नहीं देना चाहता। मेरी बेटी के लिए सभी ने प्रार्थना की। मैं किसी से नाराज नहीं हूं। मेरी बेटी शायद मेरी किस्मत में नहीं थी। उन्होंने आगे अनुरोध किया कि मेरे और मेरे परिवार को राजनीति से दूर रखें। सरकार ने हमारी मदद की।

वहीं, लड़की के चाचा ने कहा कि परिवार किसी को दोष नहीं देता, क्योंकि सरकार और डॉक्टरों ने पूरा सहयोग दिया। भगवान ने उसे हमसे छीन लिया। अब किसी को दोष देना सही नहीं होगा।

उपमुख्यमंत्री बोले- पीड़ित परिवार ने सरकार के प्रयासों की सराहना की उपमुख्यमंत्री केवी सिंह देव ने रविवार कहा कि आमतौर पर ऐसे मामलों में परिवार सरकार के खिलाफ होता है, लेकिन इस मामले में परिवार सरकार के साथ है। परिवार कह रहा है कि सरकार ने पूरी कोशिश की है। उन्होंने सरकार के प्रयासों की सराहना की है। ऐसे में किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप दुर्भाग्यपूर्ण है।

पुलिस ने कहा था- घटना में किसी के शामिल होने के सबूत नहीं मिले नाबालिग की मौत के बाद ओडिशा पुलिस ने कहा था कि जांच में अब तक किसी और व्यक्ति के शामिल होने के सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि, लड़की की मां FIR में तीन अज्ञात लोगों पर बेटी को जलाने का आरोप लगाया था।

पुलिस ने बताया था कि उन्होंने मामले की जांच पूरी ईमानदारी से की है और यह अंतिम चरण में है। वैज्ञानिक टीम, डॉग स्क्वॉड और वरिष्ठ अफसरों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। एक विशेष जांच टीम (SIT) भी बनाई गई है।

22 जुलाईः सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम शर्मिंदा हैं

इससे पहले 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, ‘हम शर्मिंदा हैं।’ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने सोमवार को कहा कि ग्रामीण इलाकों की स्कूली लड़कियों, घरेलू महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए।

कोर्ट ने केंद्र और सभी पक्षों से ठोस सुझाव मांगे हैं। कोर्ट ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और महिला सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई।

सहेली के घर जाते वक्त तीन लोगों ने आग लगा दी थी

घटना पुरी जिले के बायाबर गांव में उस वक्त हुई जब पीड़ित लड़की अपनी सहेली के घर जा रही थी। तीन लोगों ने उसे रास्ते में रोका और पेट्रोल डालकर आग लगा दी। छात्रा को आग क्यों लगाई, अभी तक इसकी कोई वजह सामने नहीं आई है।

नवीन पटनायक बोले थे- राज्य में अपराधी बेखौफ

ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा था कि इस घटना की मुझे बेहद पीड़ा है। दिनदहाड़े एक बच्ची को जलाने की कोशिश की गई, यह बेहद डरावनी बात है। एक हफ्ते पहले ही एफएम कॉलेज की छात्रा ने न्याय न मिलने पर खुद को आग लगा ली थी। एक महीना पहले गोपालपुर में भी एक भयानक घटना हुई थी।

पटनायक ने सवाल किया था, ‘क्या अब सरकार जागेगी? क्या अपराधियों को जल्द पकड़ा जाएगा? और क्या आगे ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे? ओडिशा की बेटियां इसका जवाब चाहती हैं।’

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