श्रीनगर21 मिनट पहलेलेखक: रऊफ डार
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5 अगस्त को सामूहिक नमाज के बाद कुछ लोगों ने उद्घाटन पट्टिका को पत्थरों से तोड़ा था और राष्ट्रीय प्रतीक को हटा दिया था।
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में 3 सितंबर को हजरतबल दरगाह में राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ के चिन्ह वाली शिलापट्ट तोड़ी गई। इसके अगले दिन 4 सितंबर को अनंतनाग की खिरम दरगाह में फुटब्रिज के उद्घाटन किया गया था।
यहां लगाई शिलापट्ट में केवल वक्फ बोर्ड का लोगो था, अशोक चिन्ह नहीं था। उद्घाटन में जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन दरख्शां अंद्राबी भी पहुंची थीं।
अब सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या जानबूझकर हजरतबल दरगाह में लगाई गई शिलापट्ट में अशोक स्तंभ चिन्ह उकेरा गया था। जिससे माहौल खराब किया जा सके।
वहीं, हजरतबल दरगाह में अशोक स्तंभ शिलापट्ट तोड़ने के मामले में पुलिस ने शनिवार को 26 लोगों को हिरासत में लिया है। वायरल CCTV फुटेज के आधार पर इनकी पहचान की गई।

खिरम दरगाह में फुटब्रिज उद्घाटन के शिलापट्ट पर अशोक चिन्ह नहीं है।
हजरतबल दरगाह शिलापट्ट विवाद पर किसने क्या कहा…
- PDP नेता इल्तिजा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय को जानबूझकर उकसाया जा रहा है।
- CM उमर अबदुल्ला ने कहा कि मैंने कभी किसी धार्मिक स्थल पर राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह का इस्तेमाल होते नहीं देखा, तो हजरतबल दरगाह के पत्थर पर प्रतीक चिन्ह लगाने की क्या जरूरत थी? क्या सिर्फ काम ही काफी नहीं था?
हजरतबल दरगाह की तस्वीरें…

शिलालेख में जहां अशोक स्तंभ उकेरा गया था, वह जगह ईंट-पत्थर से तोड़ दी गई।

पुरुषों के बाद महिलाएं भी विरोध में उतर आईं, उन्होंने भी शिलालेख पर पत्थर फेंके।

शिलालेख अशोक स्तंभ विवाद के बाद दरगाह पर बड़ी तादाद में पुलिस तैनात की गई है।

5 सितंबर को पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्मदिन पर हजरतबल दरगाह में भी सजावट की गई थी।
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष बोलीं- राष्ट्रीय प्रतीक से परेशानी तो जेब में नोट भी न ले जाएं
जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन दरख्शां अंद्राबी ने इस घटना को संविधान पर चोट बताया। उन्होंने विरोध करने वालों को उपद्रवी-आतंकी करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों पर FIR दर्ज न होने पर वह भूख हड़ताल करेंगी। अंद्राबी ने पुलिस और वक्फ बोर्ड के अधिकारियों से कहा-
जब भी विधायक दरगाह जाएं, उनकी तलाशी ली जाए, ताकि उनकी जेब में कोई नोट न हो। अगर है भी, तो उसे अंदर ले जाना मकरूह (घृणित) होगा। जिन लोगों को राष्ट्रीय प्रतीक के इस्तेमाल से समस्या है, उन्हें दरगाह जाते समय राष्ट्रीय प्रतीक वाले नोट नहीं ले जाने चाहिए।


कहा जाता है- हजरतबल में रखा है पैगंबर मोहम्मद का बाल
हजरतबल दरगाह जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में डल झील के उत्तरी किनारे पर बनी है। कहा जाता है कि यहां इस्लाम के पैगंबर हजरत मोहम्मद का बाल सुरक्षित रखा गया है। इस बाल को मुई-ए-मुकद्दस कहा जाता है। यहां यह 1699 ईसवीं में लाया गया था। इसे विशेष अवसरों (जैसे ईद-ए-मिलाद-उन-नबी) पर आम जनता को दिखाया जाता है।
यह जगह 17वीं शताब्दी में बाग और हवेली थी। जिसे कश्मीर के गवर्नर सुलेमान शाह ने बनवाया था। इसे इशरत महल कहा गया। बाद में मुगल शहंशाह शाहजहां के बेटे दाराशिकोह ने इसका मस्जिद के रूप में जीर्णोद्धार करवाया।
राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान पर 3 साल की सजा
भारत में अगर कोई राष्ट्रीय प्रतीकों (ध्वज, गान, संविधान, प्रतीक) का अपमान करता है, तो उसे 3 साल तक की कैद या जुर्माना हो सकता है। BNS की धारा 124 के तहह राष्ट्रीय सम्मान का अपमान करने वाले व्यक्ति को 3 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकता है।

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