शुभांशु एक खास डिवाइस में अनाज के बीजों के अंकुरण का प्रयोग कर रहे हैं।
लखनऊ के एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में किसानी करते नजर आए। शुभांशु ने पेट्री डिश में मेथी और मूंग के बीज उगाए। इसके साथ सेल्फी भी ली। इसके बाद मूंग और मेथी को स्टोरेज फ्रीजर में सुरक्षित रख दिया गया। इन बीजों को शुभांशु अपने साथ
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माइक्रो ग्रैविटी पौधों के शुरुआती विकास को किस तरह प्रभावित करती है। इसे जांचने के लिए एक्सपेरिमेंट किया है। एक्सिओम स्पेस के एक बयान में कहा गया- पृथ्वी पर लौटने के बाद इन बीजों को कई पीढ़ियों तक उगाया जाएगा, ताकि उनके जेनेटिक्स, DNA और पोषण संबंधी प्रोफाइल में होने वाले बदलावों की जांच की जा सके।
भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु 26 जून को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचे हैं। वे 41 साल बाद स्पेस में जाने वाले भारतीय हैं। वे एक्सियम मिशन- 4 के तहत 25 जून को दोपहर करीब 12 बजे सभी एस्ट्रोनॉट के साथ ISS के लिए रवाना हुए थे। आज यानी 10 जुलाई को धरती पर वापस आना था। हालांकि अभी डेट टल गई है। वे फ्लोरिडा तट पर उतरेंगे।
ISS में शुभांशु शुक्ला की तस्वीर।
शुभांशु बोले- इस मिशन से माइक्रो ग्रैविटी के लिए रास्ते खुलेंगे
एक्सिओम स्पेस की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. लूसी लोव ने बुधवार को मिशन पर गए क्रू से बात की। इस दौरान शुभांशु ने अपने वैज्ञानिक प्रयोगों के बारे में बताया। इनमें स्टेम सेल का अध्ययन, माइक्रो ग्रैविटी में बीजों का विकास, अंतरिक्ष में मस्तिष्क पर पड़ने वाला असर आदि शामिल है।
उन्होंने कहा- मैं स्टेम सेल के अध्ययन वाले प्रयोग को लेकर बेहद उत्साहित हैं। इससे पता चलेगा कि क्या सप्लीमेंट्स लेने से चोट की रिकवरी तेज होती है या नहीं। इस मिशन से माइक्रो ग्रैविटी के अध्ययन के नए रास्ते खुलेंगे। इससे भारतीय वैज्ञानिकों के लिए भी नई राह खुलेगी। मुझे गर्व है कि इसरो दुनियाभर के संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

शुभांशु पृथ्वी से कुछ अनाजों के बीज ले गए हैं, जिनके अंतरिक्ष में अंकुरण पर प्रयोग किया जा रहा है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
हम ईश्वर का बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं : पिता एसडी शुक्ला
लखनऊ में शुभांशु के पिता शंभु दयाल शुक्ला ने कहा- हम और पूरा परिवार बहुत एक्साइटेड हैं। बच्चा अब जितना जल्दी से जल्दी आए हम इसकी कामना करते हैं। ये बहुत ही गौरव की बात है कि बच्चा हमारा मिशन पूरा करके वापस आ रहा है। इसके लिए हम ईश्वर को बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं। जैसे यहां से जाने में डेट बढ़ रही थी उसी तरह वहां से आने में मौसम के साथ दूसरी चीजें भी देखी जाएंगी। हमारा बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है। उसने वीडियो कॉल पर सबकुछ बताया था कि कहां सभी लोग सोते हैं, कहां एक्सपेरिमेंट करते हैं। उन सभी ने अपना काम समय से पूरा कर लिया है।

शुभांशु के पिता एसडी शुक्ला ने कहा- मिशन पर गए सभी लोगों ने अपने टास्क समय पर पूरे कर लिए हैं।
उसके आने की खुशी में हम घर सजाएंगे : मां आशा शुक्ला
एस्ट्रोनॉट शुभांशु की मां आशा शुक्ला ने कहा- बहुत खुशी हो रही है कि बच्चा आ रहा है और हम उससे मिलेंगे। भगवान से यही प्रार्थना करते हैं कि जैसे बच्चा सकुशल मिशन पर गया उसी तरह वापस आए। बातचीत होती है तो उसकी दिनचर्या के बारे में पूछते हैं। हमारी जब बातचीत होती है तो वहां से धरती कैसी दिखती है, सूर्योदय कैसा दिखता है, यही सब दिखाता है। उसके जाते समय ऊंचाइयां छूने की खुशी हो रही थी, अब लौट रहा है तो उससे मिलने की खुशी हो रही है। जब हमारा बेटा आएगा तो घर सजाएंगे, बाहें फैलाकर उसका स्वागत करेंगे।

शुभांशु 26 जून को अंतरिक्ष गए थे। उनके लिफ्टऑफ को लखनऊ स्थित उनके स्कूल में लाइव दिखाया गया था। इस दौरान पेरेंट्स इमोशनल हो गए थे।
41 साल बाद कोई भारतीय एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष में गया
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा और भारतीय एजेंसी इसरो के बीच हुए एग्रीमेंट के तहत भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को इस मिशन के लिए चुना गया है। शुभांशु इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर जाने वाले पहले और स्पेस में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं। इससे 41 साल पहले राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत यूनियन के स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष यात्रा की थी।
शुभांशु का ये अनुभव भारत के गगनयान मिशन में काम आएगा। ये भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसका उद्देश्य भारतीय गगनयात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और सुरक्षित रूप से वापस लाना है। इसके 2027 में लॉन्च होने की संभावना है। भारत में एस्ट्रोनॉट को गगनयात्री कहा जाता है। इसी तरह रूस में कॉस्मोनॉट और चीन में ताइकोनॉट कहते हैं।

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन क्या है?
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी के चारों ओर घूमने वाला एक बड़ा अंतरिक्ष यान है। इसमें एस्ट्रोनॉट रहते हैं और माइक्रो ग्रेविटी में एक्सपेरिमेंट करते हैं। यह 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैवल करता है। यह हर 90 मिनट में पृथ्वी की परिक्रमा पूरी कर लेता है। 5 स्पेस एजेंसीज ने मिलकर इसे बनाया है। स्टेशन का पहला पीस नवंबर 1998 में लॉन्च किया गया था।

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लखनऊ के एस्ट्रोनॉट शुभांशु इन दिनों NASA के अंतरिक्ष स्टेशन पर हैं। वह वहां गाजर और मूंग दाल का हलवा खाएंगे। यहां लखनऊ में उनकी बहन शुचि ने बताया है कि शुभांशु अपने 6 साल के बेटे के खिलौने हंस को साथ ले गए हैं। वहीं, शुभांशु ने अंतरिक्ष से जारी वीडियो संदेश में कहा है कि हंस ‘जॉय’ पूरे 14 दिन तक उनके साथ अंतरिक्ष में रहेगा। (पूरी खबर पढ़िए)