मुंबई10 मिनट पहले
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उद्धव ठाकरे ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादक संजय राउत को इंटरव्यू दिया। इसका वीडियो सामना के यूट्यूब चैनल पर भी अपलोड किया गया है।
शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा- ‘ठाकरे’ एक ब्रांड नहीं महाराष्ट्र, मराठी मानुष और हिंदू अस्मिता की पहचान है। ठाकरे का मतलब ही संघर्ष है। कोई यह नाम, लोगों का प्यार या विश्वास नहीं चुरा सकता। कुछ लोग इस पहचान को मिटाने की कोशिश की लेकिन खुद ही मिट गए। उद्धव ने ये बातें पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ को दिए इंटरव्यू में कही।
शिंदे गुट पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा- जिनके पास कुछ नहीं है और जो अंदर से खोखले हैं, उन्हें ठाकरे ब्रांड की मदद लगती है। यही इस ब्रांड की खासियत है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिंदे गुट इस ब्रांड की चोरी कर रहा है और खुद को इसका भक्त बताकर अपना महत्व बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
उद्धव ने कहा कि चुनाव आयोग एक पत्थर है। उस पत्थर पर सिंदूर लगा देने से उसे ‘शिवसेना’ नाम और धनुष-बाण चिह्न किसी और को देने का अधिकार नहीं मिल जाता। यह नाम मेरे पिता और दादा ने दिया है। ठाकरे महाराष्ट्र के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

उद्धव- पत्थर को सिंदूर लगाने वाले दिल्ली में बैठे उद्धव ठाकरे ने कहा- चुनाव आयोग हमारा चुनाव चिह्न किसी और को दे सकता है या फ्रीज कर सकता है, लेकिन ‘शिवसेना’ नाम वे किसी और को नहीं दे सकता। उन्हें ये अधिकार ही नहीं है। यह नाम मेरे दादाजी और मेरे पिता ने दिया है। अगर कल मैं चुनाव आयुक्त का नाम बदलकर पत्थर रख दूं, तो चलेगा क्या?
उस पत्थर ने वो गैरकानूनी किया है। शिवसेना नाम वह किसी और को दे ही नहीं सकता। उस पत्थर को सिंदूर लगाने वाले दिल्ली में बैठे हैं, इसलिए फिलहाल यह सब चल जाता है।
उद्धव बोले- शिंदे के पास भाजपा में विलय ही आखिरी विकल्प एकनाथ शिंदे के दिल्ली दौरे पर उद्धव ठाकरे ने कहा- उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है। गुरुपूर्णिमा के दिन उन्होंने जो किया वह मीडिया के सामने है। दिल्ली जाकर कितने पैर धोएंगे और चाटेंगे? उसी से पूरा दृश्य सामने आ गया था। ऐसे लोग परावलंबी ही होते हैं। उनके पास आत्मसमर्पण करने और मालिकों की पार्टी (भाजपा) में विलीन हो जाना ही आखिरी विकल्प बचा है।
भाजपा तोड़ो और राज करो की नीति अपना रही लोकसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत न मिलने पर उद्धव ने कहा, ‘आप सभी को एक बार मूर्ख बना सकते हो। किसी एक को हमेशा मूर्ख बना सकते हो, लेकिन सभी को हमेशा के लिए मूर्ख नहीं बना सकते। लोग अब धीरे-धीरे जादू से बाहर निकलने लगे हैं।’
ठाकरे ने भाजपा की नीति को ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ कहना और खुद ही बंटवारा करना बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लोगों को हमेशा चिंताग्रस्त और तनावग्रस्त रखती है। उन्हें जाति में बांटती है ताकि उसका फायदा उठाकर शासन कर सके। भाजपा ‘तोड़ो, फोड़ो और राज करो’ की अंग्रेजों की नीति अपना रही है।