नई दिल्ली3 मिनट पहले
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दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल के कार्यकाल में 15 करोड़ के बजट वाली योजना के लिए लगभग 145 करोड़ के फर्जी बिलों वाली फाइलों को आगे बढ़ा दिया।
दिल्ली की भाजपा सरकार ने बुधवार को पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार पर कोविड काल के दौरान एक और गंभीर घोटाला करने का आरोप लगाया। भाजपा ने बाबा साहेब आंबेडकर के नाम पर चलाई गई ‘जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’ में कथित रूप से 145 करोड़ रुपए के घोटाले का दावा किया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सिफारिश पर एलजी वीके सक्सेना ने एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) को जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘वर्ष 2020-21 में आप सरकार द्वारा चलाई जा रही जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं।’
‘इस योजना का बजट सिर्फ 15 करोड़ रुपए था, लेकिन आप सरकार ने 145 करोड़ से ज्यादा के फर्जी बिलों वाली फाइलों को आगे बढ़ा दिया। आप ने दलितों के नाम पर सत्ता हथिया कर दलित बच्चों के भविष्य को लूटा है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) अब इन वित्तीय अनियमितताओं की जांच करेगी। बहुत जल्द दूध का दूध और पानी का पानी होगा।’

शिक्षा मंत्री बोले- शराब घोटाले की तरह इसमें भी वित्तीय अनियमितताएं दिल्ली सरकार में गृह, शिक्षा एवं उच्च शिक्षा मंत्री आशीष सूद और एससी/ एसटी कल्याण मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह ने मामले को लेकर कहा, ‘2018 में शुरू इस योजना का उद्देश्य एससी/एसटी और कमजोर वर्ग के बच्चों को मुफ्त कोचिंग देना था, लेकिन महामारी के दौरान शराब घोटाले की तरह इसमें भी वित्तीय अनियमितताएं की गईं।’
‘इस योजना के तहत वर्ष 2018 में 4900 और 2019 में 2071 छात्रों को कोचिंग देने का प्रस्ताव था, लेकिन कोविड महामारी के दौरान जब लाखों परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे थे, तब आप के नेताओं ने कोचिंग माफिया के साथ मिलकर भारी घोटाला किया।’
अदालत के माध्यम से कोचिंग संस्थानों को भुगतान कराया शिक्षा मंत्री सूद ने आरोप लगाया कि कोचिंग संस्थानों का असल बिल 15 करोड़ होना चाहिए था, लेकिन 31 जुलाई 2021 से अगस्त 2022 के बीच प्राइवेट कोचिंग संस्थानों ने 145 करोड़ रुपए का बिल भुगतान के लिए प्रस्तुत किया। AAP सरकार ने इन बिलों के भुगतान के लिए कोचिंग संस्थानों को अदालत भेज दिया।
इस तरह अदालत के एक आदेश के माध्यम से कोचिंग संस्थानों को भुगतान कराया गया। कोचिंग सेंटरों की सूची में 13 हजार बच्चों के नाम थे, लेकिन सरकारी जांच में केवल 3 हजार बच्चे पात्र पाए गए। वहीं, मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह ने कहा, इस घोटाले में लगभग 35 निजी संस्थान संलिप्त हैं। उनके पास 100 छात्रों की भी जानकारी नहीं है।