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पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई और उनके बेटे पूर्व विधायक भव्य बिश्नोई।
हरियाणा में करीब एक साल बाद बिश्नोई परिवार फिर राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रहा है। ताकत दिखाने के लिए इस बार पूर्व सीएम भजनलाल की जयंती (6 अक्टूबर) की बजाय उनके बेटे कुलदीप बिश्नोई के जन्मदिन 22 सितंबर का मौका चुना है। इस दिन हिसार के आदमपुर में भजनलाल की
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अब बिश्नोई परिवार भाजपा में है, लेकिन अक्टूबर 2024 के विधानसभा चुनाव में अपने गढ़ आदमपुर में मिली हार के बाद से एक तरह से राजनीतिक हाशिये पर चल रहा है। अब अगले 6-7 महीने में हरियाणा में राज्यसभा चुनाव भी होना है, उससे पहले बिश्नोई परिवार दोबारा सक्रिय दिख रहा है।
वर्तमान में बिश्नोई परिवार के पास सरकार या सत्ता में कोई बड़ी भूमिका नहीं है। कुलदीप के बेटे एवं पूर्व विधायक भव्य बिश्नोई को अप्रैल 2024 में भाजपा युवा मोर्चा के प्रभारी बनाया गया था। इस कार्यक्रम का आयोजक भव्य को ही दिखाया गया है। हालांकि जो सोशल मीडिया पर पोस्टर डाले जा रहे हैं, उनमें भव्य के भाजपा में किसी पद का जिक्र नहीं है।
पोस्टर पर नायब-खट्टर-बड़ौली की फोटो, समारोह में कोई अतिथि नहीं इस कार्यक्रम में आदमपुर और आसपास के लोगों को निमंत्रण दिया गया है। सोशल मीडिया पर प्रचार के लिए जो पोस्ट डाली हैं, उसमें सबसे बड़ी तस्वीर भजनलाल की है। इनके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, सीएम नायब सैनी, केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल व प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली की फोटो भी हैं। हालांकि इनमें से इस कार्यक्रम में कोई नहीं आ रहा है।
भजन फाउंडेशन की ओर से बाढ़ राहत सामग्री भेजेंगे पोस्ट में जिक्र है कि भजन ग्लोबल इम्पैक्ट फाउंडेशन की ओर से बाढ़ग्रस्त प्रभावितों के लिए राहत सामग्री भेजी जाएगी। इस बार हिसार के कई इलाकों में भी जलभराव का संकट झेला है।
हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, यूपी में कार्यक्रम होंगे भव्य बिश्नोई ने बताया कि चौधरी कुलदीप बिश्नोई के जन्मदिन पर सुबह सवा 9 बजे बजे आदमपुर मंडी दुकान नंबर 107 पर ‘जनहित दिवस समारोह’ होगा। हरियाणा सहित राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में चौधरी कुलदीप बिश्नोई के जन्मदिन पर साथी सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करेंगे। राज्य में भारी बारिश से जलभराव होने के चलते किसानों एवं आम जनमानस को परेशानी का सामना करना पड़ा है। इसलिए सादगीपूर्ण ढंग से समारोह मनाएंगे।

जानिए वो बड़ी वजहें, क्यों बिश्नोई परिवार ताकत दिखा रहा…
- 56 साल बाद अपने गढ़ में मिली हार: हिसार जिले के आदमपुर को भजनलाल परिवार का अभेद दुर्ग माना जाता था। आदमपुर विधानसभा पर 56 साल से बिश्नोई परिवार का कब्जा रहा। इस सीट पर पहली बार भजनलाल 1968 में विधायक बने थे। तब से लेकर जितने भी चुनाव हुए, सभी में भजनलाल परिवार ही आदमपुर से जीतता आ रहा था। मगर 2024 के विधानसभा चुनाव में भव्य बिश्नोई की हार के बाद यह किला ढह गया था।
- कुलदीप ने हाथ तक जोड़े, वोटर नहीं पसीजे: कुलदीप बिश्नोई ने लोकसभा चुनाव के समय आदमपुर में वोटरों के आगे हाथ जोड़कर वोट मांगे, मगर यहां से बीजेपी उम्मीदवार रणजीत चौटाला को कांग्रेस से कम वोट मिले। कुलदीप बिश्नोई बार-बार जनता के बीच गए और अपने पिता चौधरी भजनलाल से जुड़ाव को याद दिलाकर वोट मांगे। मगर, लोगों ने कुलदीप बिश्नोई की अपील को अनसुना कर दिया।
- सरकार में 17 साल से पद से दूर बिश्नोई परिवार: लोकसभा और इसके बाद विधानसभा चुनाव में भाजपा को आदमपुर से मिली हार से बिश्नोई परिवार सत्ता सुख से दूर हो गया। हरियाणा में बिश्नोई परिवार 17 साल से सरकार में पद से बाहर है। 2005 से 2008 तक भजनलाल के बड़े बेटे चंद्रमोहन बिश्नोई हरियाणा के डिप्टी सीएम पद पर रहे। इसके बाद चांद मोहम्मद-फिजा प्रकरण के कारण उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा।
- लंबे समय बाद राजनीतिक पुनर्वास हुआ: इसके बाद से आज तक बिश्नोई परिवार को सरकार में कोई पद नहीं मिला है। चंद्रमोहन वर्तमान में पंचकूला सीट से कांग्रेस विधायक हैं। उनका लंबे समय बाद राजनीतिक पुनर्वास हुआ है।

बिश्नोई परिवार के लिए अब आगे क्या… आदमपुर में हार ने बिश्नोई परिवार के लिए राजनीतिक संकट पैदा कर दिया है। इसका खामियाजा उनको भाजपा में भुगतना पड़ रहा है। कुलदीप बिश्नोई को बड़े पदों से दूर रखा गया और यहां तक की उनके स्थान पर पार्टी में नई आईं किरण चौधरी को राज्यसभा सांसद बनाकर भेजा। उनके बेटे भव्य बिश्नोई को संगठन की जिम्मेदारी तक ही सीमित रखा गया है। ऐसे में बिश्नोई परिवार के सामने 56 साल पुराने राज को फिर से बनाने की चुनौती रहेगी।
नाराज बिश्नोई और ओबीसी वोटरों को मनाने का प्रयास आदमपुर विधानसभा सीट पर करीब 1.78 लाख वोटर हैं। इस सीट पर जाट और ओबीसी वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। आदमपुर में सबसे ज्यादा जाट वोटर करीब 55 हजार हैं। बिश्नोई समुदाय के 28 हजार वोट हैं। अगर ओबीसी में बिश्नोई समुदाय के वोटों को छोड़ दें तो करीब 29 हजार वोट हैं। इनमें सबसे ज्यादा 8200 वोटर जांगड़ा और कुम्हार जाति के हैं। इस चुनाव में कांग्रेस बिश्नोई और ओबीसी वोटरों में सेंध लगाने में सफल रही थी। ऐसे में बिश्नोई परिवार नाराज बिश्नोई वोटरों को मनाने का प्रयास कर रहा है।
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