इम्फाल3 घंटे पहलेलेखक: एम मुबासिर राजी
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घटना शाम करीब 6 बजे नम्बोल सबल लाइकाई इलाके में हुई, जब असम राइफल्स के जवान इम्फाल से बिष्णुपुर की ओर जा रहे थे।
मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में शुक्रवार शाम आतंकवादियों ने असम राइफल्स की गाड़ी पर हमला कर दिया। हमले में 2 जवान शहीद हो गए, जबकि 5 जवान घायल हुए हैं। घायलों को पुलिस और स्थानीय लोगों ने RIMS अस्पताल पहुंचाया।
घटना के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, घटना शाम करीब 6 बजे नम्बोल सबल लाइकाई इलाके में हुई, जब असम राइफल्स के जवान इम्फाल से बिष्णुपुर की ओर जा रहे थे। इस दौरान आतंकवादियों ने घात लगाकर वाहन पर अंधाधुंध गोलियां चलाई।
हमले के बाद की 3 तस्वीरें….

बिष्णुपुर जिले में शुक्रवार शाम आतंकवादियों के हमले में असम राइफल्स के 2 जवान शहीद हो गए, जबकि 5 जवान घायल हुए हैं।

पुलिस और स्थानीय लोगों ने घायल जवानों के लिए एम्बुलेंस बुलाई और अस्पताल पहुंचाया ।

RIMS अस्पताल में 4 घायल जवानों का इलाज जारी है। घायल जवानों की संख्या अभी बढ़ सकती है।
जवान ने बताया- अचानक हमले में संभलने का मौका नहीं मिला
एक घायल जवान ने बताया कि वे पटसोई से लौट रहे थे। जहां असम राइफल्स की दूसरी टीम ड्यूटी पर थी। तभी अचानक हमला हो गया। बाइक पर सवार हथियारबंद लोगों ने छिपकर अचानक हमला किया। हमें संभलने का मौका ही नहीं मिला। कई राउंड फायरिंग करने के बाद हमलावर भाग गए।
राज्यपाल बोले- ऐसे हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने शहीद जवानों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और उनके साहस और देशभक्ति की सराहना की। उन्होंने घायल जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना भी की।
राज्यपाल ने कहा- इस तरह के हमलों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए कड़ा कदम उठाया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह बोले- हमला हम सबके लिए बड़ा झटका
मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा- हमारे बहादुर जवानों पर घात लगाकर किए गए इस हमले की खबर से मैं गहराई से दुखी हूं। दो जवानों की शहादत और कई के घायल होने की खबर हम सबके लिए बड़ा झटका है।
उन्होंने कहा- शहीदों के परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना है। जवानों का साहस और बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा और इस घिनौने हमले के दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
11 सितंबर- PM के दौरे से 2 दिन पहले मणिपुर में हिंसा

मणिपुर के चुराचांदपुर में 11 सितंबर की रात उपद्रवियों और सुरक्षाबलों की भिड़ंत हो गई थी।
पीएम मोदी के मणिपुर दौरे के दो दिन पहले भी राज्य में फिर हिंसा भड़की थी। 11 सितंबर की रात चुराचांदपुर में उपद्रवियों ने पीएम मोदी के स्वागत में लगे पोस्टर बैनर फाड़ दिए, बैरेकेडिंग गिरा दी और उनमें आग लगा दी थी।
यह घटना पीसोनमुन गांव में हुई, जो चुराचांदपुर पुलिस स्टेशन से लगभग 5 किलोमीटर दूर है। पुलिस ने उपद्रवियों को भगाया। लाठीचार्ज भी किया। पूरी खबर पढ़ें…
10 नवंबर – CRPF चौकी पर हमला करने पहुंचे 10 उग्रवादी मारे गए

जिरिबाम जिले में 10 नवंबर 2024 को मुठभेड़ के बाद उग्रवादियों के शव एक जगह रखे गए थे।
मणिपुर के जिरिबाम जिले में 10 नवंबर 2024 को CRPF जवानों ने एनकाउंटर में 10 कुकी उग्रवादियों को मार गिराया था। इन उग्रवादियों ने यहां के पुलिस स्टेशन और CRPF चौकी पर हमला किया था। जवाबी कार्रवाई के दौरान CRPF का एक जवान घायल हुआ था। पूरी खबर पढ़ें…
14 जुलाई- मणिपुर में सुरक्षाबलों के काफिले पर हमला, CRPF जवान शहीद

मणिपुर के जिरीबाम में 14 जुलाई CRPF और पुलिस टीम के काफिले पर कुकी उग्रवादियों ने हमला कर दिया था।
मणिपुर के जिरीबाम में 14 जुलाई CRPF और पुलिस टीम के काफिले पर कुकी उग्रवादियों ने हमला कर दिया था। इसमें CRPF का एक जवान शहीद हो गया था। पुलिस का एक अधिकारी भी घायल हो गया था।
पुलिस ने बताया था कि मोंगबुंग में कुकी उग्रवादियों ने पहाड़ी इलाके से गोलीबारी की। गोली CRPF जवान अजय कुमार झा के सिर पर लगी। इसके बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पूरी खबर पढ़ें…

4 पॉइंट्स में समझिए मणिपुर हिंसा की वजह…
मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।
- कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।
- मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया।
- नगा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा।
- सियासी समीकरण क्या हैं: मणिपुर के 60 विधायकों में से 40 विधायक मैतेई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रहे हैं।
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मणिपुर में हिंसा भड़काने में पाकिस्तान का कनेक्शन आया सामने: ISI के निशाने पर कुकी-मैतेई समुदाय

मणिपुर में हिंसा भड़काने के पीछे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का कनेक्शन सामने आया है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI इसकी साजिश रच रही है। इसके लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है। इसके लिए बाकायदा 15-20 फेसबुक अकाउंट बनाए गए हैं। इसके माध्यम से कुकी और मैतेई समुदाय को भड़काने वाले कंटेंट-वीडियो डाले जा रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…