रामगढ़ में क्यों बारिश नहीं करवा पाए ड्रोन?: एक्सपर्ट बोले- गलत समय हुआ प्रयोग, कंपनी का दावा- लेट परमिशन मिली, इसलिए 0.8MM बरस पाए बादल – Rajasthan News

रामगढ़ में क्यों बारिश नहीं करवा पाए ड्रोन?: एक्सपर्ट बोले- गलत समय हुआ प्रयोग, कंपनी का दावा- लेट परमिशन मिली, इसलिए 0.8MM बरस पाए बादल – Rajasthan News

रामगढ़ में क्यों बारिश नहीं करवा पाए ड्रोन?:  एक्सपर्ट बोले- गलत समय हुआ प्रयोग, कंपनी का दावा- लेट परमिशन मिली, इसलिए 0.8MM बरस पाए बादल – Rajasthan News

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जयपुर के रामगढ़ बांध में हाल ही में ड्रोन के जरिए कृत्रिम बारिश के प्रयोग पर सवाल उठ रहे हैं। 4 चरणों में 10 बार ड्रोन उड़ाकर क्लाउड सीडिंग करवाई गई। फिर भी बारिश नहीं हो सकी। हालांकि कंपनी दावा कर रही है कि वह 0.8 मिमी बारिश करवाने में सफल रही। एक्स

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भास्कर ने भारतीय मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक और संयुक्त राष्ट्र संघ के विश्व मौसम विज्ञान संगठन में स्थायी प्रतिनिधि रहे लक्ष्मण सिंह राठौड़ से इस तकनीक से जुड़े सवालों के जवाब जाने। साथ ही कृत्रिम बारिश का दावा करने वाली कंपनी के प्रतिनिधि से भी बातचीत की।

सवाल : राजस्थान में कृत्रिम बारिश के प्रयास चल रहे हैं, लेकिन सफल नहीं हो पाई? जवाब : कृत्रिम बारिश वैज्ञानिक रूप से संभव है, लेकिन इसे कब और कहां किया जाए यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। रामगढ़ बांध के एरिया में जब प्रयोग हुआ, उस समय पूरे प्रदेश में बारिश हो रही थी। जयपुर और रामगढ़ में भी वर्षा हो रही थी। ऐसे में कृत्रिम बारिश करवाने का कोई औचित्य ही नहीं था। चलती ट्रेन को धक्का देने जैसा काम है यह।

रागमढ़ बांध एरिया में 10 बार ड्रोन उड़ाकर बारिश का प्रयास किया जा चुका है।

सवाल : कृत्रिम बारिश के लिए ड्रोन तकनीक इस्तेमाल हो रही है, क्या इससे बड़े क्षेत्र में बारिश संभव है? जवाब : इस प्रयोग में ड्रोन के इस्तेमाल संदेहास्पद है। क्योंकि ड्रोन से सीमित मात्रा में ही हाइग्रोस्कॉपिक मटेरियल बादलों में छोड़ा जा सकता है। इतने बड़े पैमाने पर बारिश कराने के लिए यह तकनीक पर्याप्त नहीं है।

सवाल : एक कंपनी ने 4 बार प्रयोग किए, विफल क्यों हो रहे हैं? जवाब : जिस ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया गया वो उतनी प्रभावी नहीं है जितना जहाज या हेलिकॉप्टर के माध्यम से क्लाउड सीडिंग होती है। ड्रोन से सीमित मात्रा में ही हाइग्रोस्कॉपिक मटेरियल (बादलों से बारिश करवाने वाला रसायन) बादलों में छोड़ा जा सकता है। इतने बड़े पैमाने पर बारिश कराने के लिए यह तकनीक पर्याप्त नहीं है।

इसके साथ ही जयपुर में ड्रोन 1 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ाया गया। क्लाउड सीडिंग परिस्थितियों को देखते हुए कम से कम 2 से 4 किलोमीटर की ऊंचाई होनी चाहिए।

सवाल : आपके मुताबिक ड्रोन से बारिश कब संभव है, सही समय कब है?

जवाब : सही समय तब है जब हवा में नमी हो और पानी की जरूरत हो। मान लीजिए किसी जगह सूखा पड़ा है और वहां पानी की जरूरत हो तो क्लाउड सीडिंग करके सीमित क्षेत्र में कृत्रिम बारिश की जा सकती है। लेकिन इसके लिए मौसम और वातावरण देखने के बाद ही प्रयास करना चाहिए।

ड्रोन से बारिश का प्रयोग अब तक सफल हुआ है, ऐसा मुझे नहीं लगता है। क्योंकि क्लाउड सीडिंग के लिए अधिक उंचाई के साथ-साथ पर्याप्त मात्रा में हाइग्रोस्कॉपिक मटेरियल छोड़ना पड़ता है। यह सब हवाई जहाज या हेलिकॉप्टर से किया जा सकता है।

ड्रोन में बने बॉक्स में बारिश करवाने के लिए जरूरी 1.5 किलो रसायन डालते हुए कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा।

ड्रोन में बने बॉक्स में बारिश करवाने के लिए जरूरी 1.5 किलो रसायन डालते हुए कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा।

सवाल : कृत्रिम बारिश की भारत और विश्व में सफलता पर कोई आंकड़ा है क्या? जवाब : अब तक भारत ही नहीं, विश्व में किए गए कृत्रिम बारिश के प्रयोगों से कोई ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं कि क्लाउड सीडिंग से ही बारिश हुई हो।

यह तय करना बहुत कठिन है कि बारिश प्राकृतिक तरीके से हुई या आपके प्रयोग से। अब तक कोई एविडेंस-बेस्ड रिसर्च इसे पूरी तरह सफल साबित नहीं कर पाई है।

सवाल : इसके क्या फायदे और क्या नुकसान हैं, दोनों बताइए। जवाब : कृत्रिम बारिश का महत्व सूखे जैसी गंभीर परिस्थितियों में ही है।

  • फायदा : जब पानी की भारी कमी हो, पीने का संकट खड़ा हो और बादल मौजूद हों तो यह प्रयोग सार्थक हो सकता है।
  • नुकसान : सक्रिय मानसून में ऐसे प्रयोग से कुछ इलाकों में अतिरिक्त बारिश हो सकती है, जो नुकसानदेह भी साबित हो सकती है।

कृत्रिम बारिश का दावा करने वाली कंपनी (GenXAI) के प्रतिनिधि राकेश अग्रवाल से सवाल-जवाब

सवाल : कृत्रिम बारिश की जरूरत सूखे इलाकों में ज्यादा पड़ सकती है, तो फिर ये प्रयोग किसी ऐसे क्षेत्र में क्यों नहीं कर रहे? जवाब : रामगढ़ जयपुर की लाइफ लाइन माना जाता था। रामगढ़ में पानी लाने के लिए सरकारों ने कई बार सरकार प्रयास किए। लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। ऐसे में सरकार और जनता की मंशा को देखते हुए रामगढ़ बांध क्षेत्र को चुना गया। अगर सरकार मौका देगी तो सूखे इलाकों में भी कृत्रिम बारिश करने का प्रयास जरूर करेंगे।

कंपनी का दावा है कि वो अमेरिका की AI तकनीक का इस्तेमाल कर ड्रोन से बारिश करवा सकती है।

कंपनी का दावा है कि वो अमेरिका की AI तकनीक का इस्तेमाल कर ड्रोन से बारिश करवा सकती है।

सवाल : आपने यही जगह क्यों चुनी, जबकि रामगढ़ क्षेत्र में आमतौर पर बारिश हो ही जाती है? जवाब : रामगढ़ में बारिश तो होती है लेकिन पानी भरता नहीं है हमारी कोशिश थी की रामगढ़ को भरें। दूसरा हमने सरकार को अपनी तकनीक के बारे में बताया था तो सरकार ने सुझाव दिया कि रामगढ़ बांध में यह प्रयोग किया जाए।

कंपनी बोली- समय पर अनुमति नहीं मिली कृत्रिम बारिश कराने वाली कंपनी के फाउंडर राकेश अग्रवाल ने बताया- हम मई से लेकर जुलाई में यह प्रयोग करना चाहते थे। मगर, सरकारी विभागों से अनुमति देर से मिलने के कारण उन्हें अगस्त अंत में प्रयोग करना पड़ा। कंपनी ने 10 हजार फीट की ऊंचाई पर ड्रोन उड़ाकर यह प्रयोग चार बार किया है। कंपनी वैज्ञानिक आधार पर इसे सफल बता रही है, जबकि मौसम वैज्ञानिक इसे विफल मान रहे हैं।

विश्व स्तर पर क्या हैं नियम राठौड़ ने बताया कि विश्व मौसम संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र ने कृत्रिम बारिश जैसे वेदर मॉडिफिकेशन प्रयोगों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए हैं।

1978 में हुए UN Convention के तहत बड़े पैमाने पर मौसम में बदलाव करने वाले प्रयोगों पर रोक लगाई गई। वजह यह रही कि युद्धकाल में ऐसे प्रयोगों का दुरुपयोग कर दूसरे देशों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

ड्रोन से बारिश कराने की यह खबर भी पढ़िए…

जयपुर में कृत्रिम बारिश की पहली कोशिश फेल हुई:कंपनी बोली- बादल काफी ऊपर थे, 400 फीट ऊंचाई तक ही ड्रोन उड़ाने की अनुमति है

जयपुर के रामगढ़ बांध इलाके में मंगलवार को ड्रोन से कृत्रिम बारिश करवाने का पहला प्रयास फेल हो गया। बादल काफी ऊपर थे। इसलिए क्लाउड सीडिंग नहीं हुई। ड्रोन 400 फीट तक ही उड़ा पाए। इससे ऊपर उड़ाने की अनुमति नहीं थी। पढ़ें पूरी खबर…

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