देश में पालतू जानवरों की तस्करी बढ़ी: 5 साल में 4 गुना हुई, सबसे ज्यादा मुंबई एयरपोर्ट स्मगलिंग; 60% मामलों में दस्तावेज अधूरे

देश में पालतू जानवरों की तस्करी बढ़ी: 5 साल में 4 गुना हुई, सबसे ज्यादा मुंबई एयरपोर्ट स्मगलिंग; 60% मामलों में दस्तावेज अधूरे

देश में पालतू जानवरों की तस्करी बढ़ी:  5 साल में 4 गुना हुई, सबसे ज्यादा मुंबई एयरपोर्ट स्मगलिंग; 60% मामलों में दस्तावेज अधूरे


मुंबई32 मिनट पहलेलेखक: एम. रियाज हाशमी

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विदेश से तस्करी किए जाने वाले जानवरों में कुत्तों, बिल्ली शामिल हैं।

भारत में विदेशी पालतू जानवरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इनमें विदेशी नस्ल के कुत्ते और अन्य जानवर शामिल हैं। इस मांग के कारण तस्करी में तेजी आई है, साथ ही संक्रमण का भी खतरा बढ़ा है।

पिछले 5 साल में जिंदा जानवरों का इम्पोर्ट चार गुना बढ़कर 45 हजार से ज्यादा हो गया है। इसके बावजूद इस प्रक्रिया की न तो पारदर्शी निगरानी हो रही है और न ही सरकारी जवाबदेही तय है।

जुलाई 2025 में एक पशु कल्याण कार्यकर्ता ने मुंबई एयरपोर्ट को तस्करी का केंद्र बताते हुए महाराष्ट्र सरकार को अपील भेजी थी। इसके बाद अगस्त 2025 में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने निर्देश जारी किए।

अब किसी विमान में अघोषित जीवित जानवर मिलने पर उसे तुरंत उसके देश वापस भेजा जाएगा। इसकी जिम्मेदारी एयरलाइन की होगी। साथ ही, स्टाफ को पहचान और दस्तावेज जांच की ट्रेनिंग देना अनिवार्य किया गया है।

कौन-कौन से जानवर लाए जा रहे हैं विदेश से सबसे ज्यादा पालतू कुत्ते, बिल्लियां, मकाऊ और अफ्रीकी ग्रे पैरेट जैसे दुर्लभ पक्षी, छिपकली और सांप जैसे जीव और सजावटी मछलियां भारत लाई जा रही हैं। कई बार डेयरी और प्रजनन के लिए पशुधन भी आता है।

कई प्रजातियां संरक्षित हैं, जिन्हें पालतू या प्रदर्शन के लिए खरीदा जाता है। इन जानवरों के साथ एवियन फ्लू, रेबीज और निपाह जैसे रोगों का खतरा भी बढ़ता है। कई बार दुर्लभ प्रजातियों को वैध आयात के नाम पर लाया जाता है, जो तस्करी की श्रेणी में आता है।

कानूनी ढांचा और नियम भारत में विदेशी जानवरों का आयात केवल स्वास्थ्य प्रमाणपत्र और टीकाकरण रिकॉर्ड के साथ ही किया जा सकता है। एनिमल क्वारेंटाइन एंड सर्टिफिकेशन सर्विसेज (एक्यूसीएस) के नियमों के अनुसार, प्रजाति और देश के आधार पर क्वारेंटाइन अवधि तय होती है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और साइट्स संधि के तहत संरक्षित प्रजातियों के लिए विशेष अनुमति जरूरी है।

कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं दैनिक भास्कर ने एक्यूसीएस से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी, लेकिन केवल सालवार कुल संख्या दी गई। प्रजाति, देश और उद्देश्य के अनुसार कोई विवरण नहीं मिला। डिपोर्ट या रिजेक्शन का भी कोई रिकॉर्ड साझा नहीं किया गया। विदेशी नस्ल के पालतू जानवरों का शौक और सोशल मीडिया पर ‘विदेशी पालतू’ का ट्रेंड इस प्रवृत्ति को बढ़ा रहा है। इससे ही तस्करी को बढ़ावा मिला है।

एक्यूसीएस की समीक्षा

डीजीसीए के निर्देशों के बाद इंडिगो और एअर इंडिया ने स्टाफ के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल शुरू किए हैं। इनमें दस्तावेज जांच, जानवरों की पहचान और वापसी प्रक्रिया शामिल है। 2025 की दूसरी तिमाही में एक्यूसीएस की समीक्षा में पाया गया कि 60% मामलों में दस्तावेज अधूरे थे।

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