रामपाल के दो आश्रमों का ड्रोन व्यू।
पिछले 11 साल से हिसार जेल में बंद सतलोक आश्रम संचालक रामपाल फिर सुर्खियों में है। पिछले दिनों हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी। जिसके बाद अचानक रामपाल के आश्रमों में हलचल बढ़ गई है। अनुयायी कह रहे हैं कि ‘संत महाराज’ बाहर आने वाले हैं।
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जेल में बंद होने के बावजूद रामपाल का साम्राज्य फैल गया है। सतलोक आश्रम के कॉल सेंटर चल रहे हैं। जगत गुरु के नाम से एक वेबसाइट बनी है। कॉल सेंटर पर विश्वासपात्र लोगों के नंबर दिए गए हैं, जो भारत में कहीं भी रामपाल से नाम दीक्षा दिलाने का दावा करते हैं। इन कॉल सेंटर के नंबर पर ऑप्शन दिए जाते हैं, जिसको जैसी जानकारी रामपाल व उसके कामों के बारे में चाहिए, वो सब बताई जाती है।
नाम दीक्षा भी रामपाल के सामने दिलवाने का दावा किया जाता है। रामपाल की नाम दीक्षा की रिकॉर्डिंग इन कॉल सेंटरों के एजेंटों के पास मौजूद है। इनके पास हर जिले व उसके आसपास के संगतों की एक सूची है। इनके पास एक सीरीज के नंबर हैं। यह नाम दीक्षा लेने वाले व्यक्ति को एक निश्चित जगह पर ले जाते हैं और रामपाल महाराज की वीडियो चलाकर उसे नाम दीक्षा दिलवा देते हैं। दावा है कि हजारों लोग नाम दीक्षा ले चुके हैं।
रामपाल के सत्संग में खड़े हजारों की तादाद में उसके अनुयायी।
11 साल में 11 आश्रम बना चुका रामपाल रामपाल साल 2014 से देशद्रोह के मामले में हिसार की सेंट्रल जेल में सजा काट रहा है। रामपाल के 2014 में हरियाणा में रोहतक के करौंथा और हिसार के बरवाला में 2 आश्रम थे। तीसरा मध्यप्रदेश में बन रहा था। अब आश्रमों की संख्या 11 हो गई है। करौंथा और बरवाला आश्रम सरकार के अधीन हैं। रामपाल के सोनीपत के धनाना, भिवानी और कुरुक्षेत्र में भी बड़े आश्रम खड़े कर लिए हैं। इनके संचालन को तीन स्तरीय कमेटियां बनी हैं। राष्ट्रीय कमेटी सीधे रामपाल के अधीन काम करती है और संपर्क में रहती है। आगे राज्य व जिला स्तरीय कमेटियां हैं।

2 बड़ी वजह…अनुयायियों से क्यों कह रहे कि संत महाराज जल्द आएंगे…
- 14 में से 11 केसों में बरी हो चुका रामपाल: रामपाल के वकालतनामा पर हस्ताक्षर करने वाले हिसार के एडवोकेट कुलदीप ने बताया कि रामपाल महाराज 2014 से जेल में बंद हैं। उन पर कुल 14 केस लगे थे। उनमें से 11 केस में वे बरी हो चुके हैं। 2 केस जिनका मुकद्दमा नंबर 429 और 430 है, उनमें हाईकोर्ट ने उनकी उम्रकैद की सजा को सस्पेंड कर दिया है। अभी देशद्रोह का मुकद्दमा नंबर 428 है। इसमें 1000 से ज्यादा लोग शामिल थे। इनमें अधिकतर की बेल हो चुकी है, मगर अभी तक इस केस में रामपाल ने बेल नहीं लगाई है। संभावना है कि अर्जी लगाने पर बेल मिल जाएगी। हिसार में रामपाल का केस लड़ने वाले उनके वकील महेंद्र सिंह नैन बताते हैं कि उनके पास रामपाल का एक केस है, जो अंडर ट्रायल है।
- हाईकोर्ट से हाल ही में मिली है राहत: सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से हाल ही में बड़ी राहत मिली है। 2014 में आश्रम में दिल्ली के बदरपुर की सरिता और पंजाब में संगरूर की मलकीत कौर, राजबाला, संतोष और डेढ़ साल के आदर्श की मौत मामले मिली उम्रकैद की सजा पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। इससे पहले हाईकोर्ट ने आश्रम में मिली एक महिला की लाश मामले में उम्र कैद की सजा पर रोक लगाई थी। हाईकोर्ट अब तक हत्या के दो मामलों में रामपाल की सजा निलंबित कर चुका है। हाईकोर्ट ने कहा था कि अपीलकर्ता के खिलाफ यह आरोप जरूर है कि उन्होंने महिलाओं को आश्रम में बंद रखा था, लेकिन मेडिकल साक्ष्यों को लेकर गंभीर जिरह योग्य मुद्दे मौजूद हैं। अदालत ने माना कि रामपाल की उम्र 74 वर्ष है और वह पहले ही 10 साल 27 दिन की वास्तविक सजा काट चुका।

रामपाल की दो तस्वीरें- एक जवानी और दूसरी बाद की। फाइल फोटो
अब जानिए…कैसे सिंचाई विभाग का जेई ‘संत’ बना, फिर जेल की नौबत आई
सोनीपत के धनाना में जन्म, सिंचाई विभाग में नौकरी की रामपाल का जन्म 8 सितम्बर 1951 को सोनीपत के गांव धनाना में एक किसान परिवार में हुआ था। पिता नंदराम और माता इंद्रादेवी थी। रामपाल ने इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया और हरियाणा सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर (JE) की नौकरी मिली। तारा देवी से शादी की और पांच बच्चों का पिता बना। इसी दौरान कबीरपंथी संत स्वामी रामदेवानंद महाराज से मुलाकात हुई। साल 1995 में सरकारी नौकरी छोड़कर धार्मिक प्रवचन- सत्संग शुरू कर दिए।
1999 में दान की जमीन पर करौंथा में आश्रम कहा जाता है कि साल 1999 में रोहतक के करौंथा गांव में दान में मिली जमीन पर रामपाल ने आश्रम बनाया। हालांकि करीब 4 एकड़ जमीन दान में फर्जीवाड़ा करने को लेकर विवाद शुरू हो गया। विवादों के बीच धीरे-धीरे प्रसिद्धि और अनुयायी बढ़ते गए। साल 2006 में आर्य समाज की प्रमुख पुस्तक ‘सत्यार्थ प्रकाश’ पर टिप्पणी की, जिससे रामपाल आर्य समाजियों के निशाने पर आ गया। विवाद इतना बढ़ा कि टकराव की नौबत आ गई। करौंथा आश्रम के बाहर रामपाल अनुयायियों और आर्य समाज समर्थकों के बीच हिंसा हुई, जिसमें आर्य समाजी की मौत हो गई और 59 से अधिक घायल हुए।

इस हिंसा के उस समय कई वीडियो सामने आए थे जिसमें लोग हिंसक होते नजर आ रहे थे, पूरे इलाके में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई थी।- फाइल फोटो
2006 में हत्या में नामजद, 2 साल जेल काटी साल 2006 में डेरा खाली करवाने को लेकर विवाद हुआ था। आर्य समाज के लोगों से टकराव हुआ था। उस दौरान रामपाल पर धारा 302 के तहत केस दर्ज हुआ था। गिरफ्तार होने पर दो साल तक जेल में रहा। अदालत से जमानत पर रिहा होकर बरवाला आया था। दौलतपुर रोड पर एक एकड़ जमीन पर आश्रम बनाया। फिर चंडीगढ़ रोड पर साढ़े 12 एकड़ जमीन का सौदा किया।
करौंथा आश्रम सील हुआ तो बरवाला में जमाया डेरा साल 2006 में आर्य समाजियों से हुई झड़प के बाद पुलिस ने करौंथा आश्रम सील कर दिया। इसके बाद रामपाल ने हिसार जिले के बरवाला कस्बे के पास एक नया और बड़ा आश्रम बनवाना शुरू किया। यह आश्रम 2008-2009 के आसपास पूरी तरह सक्रिय हो गया। यहीं से प्रवचन-सत्संग शुरू हुए। बरवाला आश्रम को “सतलोक आश्रम” नाम दिया। रामपाल समर्थकों ने हिसार कोर्ट में भी हंगामा किया था, जिसके बाद पुलिस ने बाबा और उनके समर्थकों पर केस दर्ज कर लिया।

आश्रम के बाहर धरने पर बैठे रामपाल के समर्थक।
हाईकोर्ट के बार-बार बुलाने पर भी नहीं गया रामपाल मामला हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट के बार-बार बुलाने के बाद भी रामपाल कोई न कोई बहाना बनाकर पेश होने से बचता रहा। इसके बाद 2013 में फिर करौंथा गांव में आश्रम पर कब्जे को लेकर काफी संख्या में उनके समर्थक आश्रम के अंदर घुस गए। यहां हुई झड़प में दो लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हुए थे।
हाईकोर्ट से फटकार लगने के बाद सरकार सख्त हुई नवंबर 2014 में हाईकोर्ट ने करौंथा में युवक की मौत मामले में रामपाल को पेश होने के आदेश दिए थे। 5 नवंबर, 2014 को हाईकोर्ट ने रामपाल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए। 10 नवंबर को पुलिस के पास रामपाल को कोर्ट में पेश करने का समय था। रामपाल को समर्थकों ने अस्वस्थ बताकर पेश नहीं होने दिया था।
रामपाल के हाईकोर्ट में पेश नहीं होने पर सरकार और प्रशासन को फटकार लगी। पुलिस ने कोर्ट में पेश करने के लिए ऑपरेशन शुरू किया, जो 10 दिन चला था। 18 नवंबर, 2014 को पुलिस ने रामपाल की गिरफ्तारी के लिए आश्रम में प्रवेश करना चाहा तो समर्थकों से टकराव हुआ था।

रामपाल के समर्थक उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं।
पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच टकराव के बाद गिरफ्तारी 19 नवंबर तक रामपाल समर्थकों और पुलिस के बीच टकराव रहा। इस दौरान छह लोगों की मौत हो गई। दोनों तरफ से कई घायल हुए थे। 20 नवंबर, 2014 को रामपाल की गिरफ्तारी के बाद आश्रम खाली करवाकर पुलिस ने कब्जे में लिया। 11 अक्टूबर, 2018 को हत्या के दो मुकदमों में रामपाल समेत 29 को दोषी करार दिया गया था। इन्हें आजीवन कारावास की कैद हो चुकी है, जबकि देशद्रोह के मामले में अभी सुनवाई जारी है।

पुलिस की गिरफ्त में खड़ा रामपाल- फाइल फोटो।
11 साल में रामपाल को फरलो नहीं मिली, राम रहीम 14 बार बाहर आया सतलोक आश्रम संचालक रामपाल साल 2014 में हुई गिरफ्तारी के बाद से कभी पैरोल-फरलो पर जेल से बाहर नहीं आया है। जुलाई 2020 में रामपाल ने पोती की शादी में शामिल होने के लिए सुप्रीम कोर्ट से परोल मांगी थी। कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी। दूसरी तरफ डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम 7 साल में 14 बार पैरोल-फरलो पर जेल से बाहर आ चुका है। चार वर्षों में कुल 366 दिन तक जेल से बाहर रहने की अनुमति मिली है।
अब सतलोक आश्रम भी डेरा सच्चा सौदा की तरह सेवा कार्य में जुटा रामपाल डेरा सच्चा सौदा की तरह ही अपना पूरा नेटवर्क खड़ा कर रहा है। मेंबरी कमेटियों के बाद अब उसने सेवा काम भी डेरे की तरफ शुरू कर दिए हैं। हाल ही में रामपाल ने जेल से ही अन्नपूर्णा मुहिम चलाने का आदेश संगत को दिया है। इस मुहिम का मकसद यह देखना है कि गांव या शहर में कोई भूखा ना सोए।
ऐसा परिवार अगर मिलता है तो रामपाल की टीम उस परिवार को गोद ले लेती है। वह गोद लिए परिवार का मकान बनवाने, बच्चों की शिक्षा और राशन तक का खर्च उठाती है। हाल ही में हिसार के गांव गुराना और कौथ कलां में मकान ढहने की घटना के बाद रामपाल के शिष्य वहां गए थे और परिवार को मदद करने का आश्वासन देकर आए हैं। पंजाब में बाढ़ पीड़ितों की मदद का काम भी सतलोक आश्रम कर रहा है।

रामपाल का सतलोक आश्रम जहां की भव्यता किसी शानदार इमारत से कम नहीं है।
रामपाल का अवतरण दिवस मनाया जा रहा भले ही रामपाल जेल में हो मगर संगत रामपाल का अवतरण दिवस मना रही है। देशभर में रामपाल के आश्रम में 6, 7 और 8 सितंबर को अवतरण दिवस मनाया जा रहा है। इसमें 3 दिन गुरु का अखंड पाठ होगा। इसके अलावा रक्तदान शिविर, देह दान, दहेज और नशा उन्मूलन की शपथ संगतों को दिलाई जाएगी। साल में 6 बार रामपाल के आदेश पर इसी यह कार्यक्रम होते हैं। सितंबर, दिसंबर, जनवरी और फरवरी में यह कार्यक्रम होते हैं।

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