महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में आम भक्तों के प्रवेश पर रोक और वीआईपी श्रद्धालुओं को विशेष अनुमति देने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कलेक्टर के जारी आदेश को सही ठहराया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलेगा, यह तय करने का

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इंदौर के रहने वाले शख्स ने याचिका लगाई थी 18 अगस्त को इंदौर निवासी याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने वकील चर्चित शास्त्री के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। याचिका में सवाल उठाया गया कि जब आम भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं है, तो नेताओं, उनके परिजनों, व्यापारियों और रसूखदार लोगों को यह सुविधा क्यों दी जा रही है?

गुरुवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था, जिसे सोमवार को सुनाया गया। कोर्ट ने कहा कि मंदिर में वर्तमान में जो व्यवस्था है, उसे फिलहाल जैसे का तैसा बनाए रखा जाए।

वकील बोले- रिव्यू पिटीशन दाखिल करेंगे एडवोकेट चर्चित शास्त्री ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद वे एक-दो दिन में रिव्यू पिटीशन दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा, यह लाखों महाकाल भक्तों का मामला है, हम दोबारा अपनी बात कोर्ट के समक्ष रखेंगे। याचिका में प्रदेश सरकार, महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति, उज्जैन कलेक्टर और एसपी उज्जैन को पक्षकार बनाया गया है।

गुरुवार को हुई सुनवाई में एडवोकेट शास्त्री ने तर्क दिया था कि दूर-दराज से आने वाले आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया जाता, जबकि प्रभावशाली लोगों को विशेष अनुमति मिल जाती है। यह व्यवस्था भेदभावपूर्ण और अनुचित है।

कोर्ट के निर्णय के अनुसार, जब तक कोई नया आदेश नहीं आता, गर्भगृह में प्रवेश व्यवस्था पूर्ववत बनी रहेगी, यानी आम भक्त गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर सकेंगे और यह अधिकार केवल कलेक्टर के विवेक पर आधारित रहेगा।



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