मणिमहेश यात्रा पर गए श्रद्धालु को रस्सी बांधकर रेस्क्यू करते हुए स्थानीय प्रशासन।
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला के भरमौर में बीते चार दिनों के दौरान 11 श्रद्धालुओं की मौत हुई। ये श्रद्धालु मणिमहेश यात्रा पर निकले थे। मगर ऑक्सीजन की कमी और लैंडस्लाइड की चपेट में आने से इनको जान गंवानी पड़ी। इनमें 3 पंजाब के पठानकोट, 5 चंबा, 1 उत्तर प्
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पंजाब के पठानकोट के अमन (18), रोहित (18) और गुरुदासपुर के अनमोल (26) की मौत 25 अगस्त को हुई। तीनों के शव पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए गए है। अमन को कमल कुंड से रेस्क्यू किया गया था और गौरीकुंड में मौत हो गई, जबकि रोहित की मौत कुगती ट्रैक पर ऑक्सीजन की कमी से हुई है। वहीं अनमोल की मौत धंचो में हुई।
मणिमहेश यात्रा पर गए श्रद्धालु जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार करते हुए।
खजियार में 2 बच्चे फ्लैश फ्लड में बहे
25 अगस्त को ही चंबा निवासी दर्शन देवी की पत्थर लगने से मौत हुई। इसके अगले दिन यानी 26 अगस्त को भरमौर की बसोदन पंचायत में बादल फटने के बाद खजियार के समीप चंबा के 2 बच्चे फ्लैश फ्लड की चपेट में आने से बह गए।
2 महिलाओं की पत्थर लगने से मौत
इसी दिन चंबा की 2 महिलाओं की मौत पहाड़ी से पत्थर गिरने से हुई। मृतक की पहचान सलोचना (38) कविता (33) के निवासी मेहला तौर पर हुई, जबकि पत्थर लगने से ब्यासो देवी घायल हो गई।
26 अगस्त को ही तीसा में एक महिला की पत्थर लगने से मौत और 2 घायल हो गए। मृतक की पहचान रेखा देवी निवासी चयूली चुराह के तौर पर हुई। खेम राज और जय दयाल पत्थर लगने से घायल हो गए।
UP के सागर की कुगती ट्रैक पर मौत
28 अगस्त को उत्तर प्रदेश के सागर भटनागर की कुगती ट्रेक पर मौत हो गई, जबकि इनके साथ 5 अन्य को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया।
कुछ श्रद्धालुओं की मौत तीन से चार दिन पहले हो गई है। मगर 24 से 26 अगस्त के बीच हुई भारी बारिश से पूरे चंबा जिला में मोबाइल कनेक्टिविटी ठप हो गई। चार दिन बाद गुरुवार शाम को चंबा शहर में मोबाइल नेटवर्क रिस्टोर हुआ है। चंबा के अन्य क्षेत्रों में आज भी मोबाइल नेटवर्क नहीं है। इससे प्रशासन ने आज इन मौत को पुष्टि की है।

भरमौर में फंसे श्रद्धालु भारी बारिश के बाद उफनते नाले को पार कर वापस लौटते हुए।
इस साल 22 श्रद्धालुओं की मौत
बीते साल 8 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने मणिमहेश यात्रा की थी। मगर इस बार शुरू से ही खराब मौसम ने मणिमहेश यात्रा में व्यवधान डाला है। इस साल अब तक 22 श्रद्धालुओं की जान जा चुकी है।
16 अगस्त से शुरू हुई मणिमहेश यात्रा
इस साल मणिमहेश यात्रा आधिकारिक तौर पर 16 अगस्त से 31 अगस्त तक चलनी थी। मगर भारी बारिश से तबाही के बाद यात्रा 6 दिन पहले ही स्थगित कर दिया गया। इस यात्रा के लिए देश के श्रद्धालु पहुंचते हैं। मणिमहेश यात्रा को उत्तर भारत की कठिन धार्मिक यात्रा माना जाता है। 13 हजार फुट से ज्यादा की ऊंचाई पर स्थिति मणिमहेश पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को ऊंचे-ऊंचे पहाड़ चढ़ने पड़ते हैं।
14 किलोमीटर पैदल चलकर पूरी होती है यात्रा
मणिमहेश पहुंचने के लिए पहले पंजाब के पठानकोट या फिर हिमाचल के कांगड़ा पहुंचना पड़ता है। यहां से सड़क मार्ग से चंबा होते हुए भरमौर पहुंचना पड़ता है। भरमौर से ज्यादातर लोग इस यात्रा को पैदल चलकर पूरी करते हैं। कुछ लोग भरमौर के हड़सर से हेलि टैक्सी या फिर घोड़ों पर भी मणिमहेश पहुंचते है। हड़सर से लगभग 14 किमी की पैदल यात्रा करके मणिमहेश झील तक पहुंचा जा सकता है।
मणिमहेश को लेकर क्या है मान्यता
मान्यता है कि मणिमहेश में कैलाश शिखर पर भगवान भोले निवास करते हैं, जो मणिमहेश की डल झील से दिखाई देता है। माना जाता है कि यह यात्रा 9वीं शताब्दी में शुरू हुई थी, जब एक स्थानीय राजा, राजा साहिल वर्मन को भगवान शिव के दर्शन हुए थे, जिन्होंने मणिमहेश झील पर एक मंदिर स्थापित करने का निर्देश दिया।