नई दिल्ली2 मिनट पहले
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीए की डिग्री सावर्जनिक करने का केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) का आदेश दिल्ली हाईकोर्ट ने पलट दिया है। अब दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) को प्रधानमंत्री की डिग्री नहीं दिखानी होगी।
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस सचिन दत्ता ने सुनाया ने सोमवार को DU की याचिका पर सुनवाई की। वहीं, फैसले का पूरे आदेश की कॉपी अभी आना बाकी है।
CIC ने एक RTI एक्टिविस्ट की याचिका पर दिल्ली यूनिवर्सिटी को 1978 में बीए की परीक्षा पास करने वाले सभी छात्रों के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने का आदेश दिया था। PM मोदी ने भी इसी साल परीक्षा पास की थी।
RTI एक्टिविस्ट की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने दलील दी-
जो जानकारी मांगी गई है, वह हर विश्वविद्यालय सार्वजनिक करता है। इसे अक्सर नोटिस बोर्ड पर, विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर और कई बार अखबारों में भी छापी जाती है।

इधर, DU की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा और कहा कि महज जिज्ञासा को RTI के जरिए सूचना मांगने का आधार नहीं मान सकते हैं।

CIC ने कहा था- डिग्री का ब्योरा सार्वजनिक दस्तावेज
मामला 2016 में शुरू हुआ था, जब RTI कार्यकर्ता नीरज कुमार ने DU से 1978 में BA पास करने वाले सभी छात्रों का नाम, रोल नंबर, अंक और पास-फेल का ब्योरा मांगा था। उस साल पीएम मोदी के भी BA पास करने का जिक्र है। CIC ने इसको लेकर दिया था कि यह जानकारी सार्वजनिक की जाए, क्योंकि विश्वविद्यालय एक सार्वजनिक संस्था है और डिग्री का ब्योरा सार्वजनिक दस्तावेज माना जाता है।
DU का तर्क- छात्रों की जानकारी गोपनीय
DU ने इस आदेश को चुनौती दी और कहा कि छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी “फिड्युशियरी कैपेसिटी” (भरोसे में रखी गई गोपनीय जानकारी) के तहत आती है, जिसे किसी अजनबी को नहीं दिया जा सकता। विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि कोर्ट को रिकॉर्ड दिखाने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।