राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संबोधन: द्रौपदी मुर्मू बोलीं- पहलगाम हमला कायराना था, ऑपरेशन सिंदूर में सेना ने सीमा पार आतंकियों के गढ़ को खत्म किया

राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संबोधन: द्रौपदी मुर्मू बोलीं- पहलगाम हमला कायराना था, ऑपरेशन सिंदूर में सेना ने सीमा पार आतंकियों के गढ़ को खत्म किया

राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संबोधन:  द्रौपदी मुर्मू बोलीं- पहलगाम हमला कायराना था, ऑपरेशन सिंदूर में सेना ने सीमा पार आतंकियों के गढ़ को खत्म किया

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27 मिनट पहले

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राष्ट्रपति मुर्मू के पिछले 3 संबोधन…

25 जनवरी 2025: राष्ट्रपति बोलीं- हमारा संविधान जीवंत दस्तावेज, यह सामूहिक अस्मिता का मूल आधार

76वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। अपनी स्पीच की शुरुआत उन्होंने देश को बधाई देकर की। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान एक जीवंत दस्तावेज है, जो हमारी सामाजिक अस्मिता का मूल आधार है।

किसी राष्ट्र के इतिहास में 75 साल का इतिहास पलक झपकने जैसा होता है। भारत के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता है। इस काल खंड में भारत की चेतना जागी। इस ऐतिहासिक अवसर पर आप सबको संबोधित करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। पूरी खबर पढ़ें…

14 अगस्त 2024: मुर्मू बोलीं- आजादी के त्योहार में शामिल होने वाले सभी देशवासी परिवार

78वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर 14 अगस्त 2024 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश को 20 मिनट संबोधित किया था। उन्होंने कहा था कि आजादी के त्योहार में शामिल होने वाले सभी देशवासी हमारा परिवार हैं।’

राष्ट्रपति ने कहा था, ‘आजादी का यह पर्व हमें उन दिनों की याद दिलाता है, जब देश के लिए कई लोगों ने बलिदान दिया। हमारे स्वाधीनता सैनानियों ने हमें नई अभिव्यक्ति प्रदान की। सरदार पटेल, बोस, भगत सिंह, बाबा साहेब अंबेडकर जैसे कई अन्य लोग थे, जिनके बलिदान की सराहना होती रही है।’ पूरी खबर पढ़े…

25 जनवरी 2024: मुर्मू बोलीं- भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा अमृत काल

75वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संख्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 जनवरी 2024 को 23 मिनट का भाषण दिया था। अपने संबोधन में उन्होंने राम मंदिर का जिक्र किया साथ ही कर्पूरी ठाकुर को भी श्रद्धांजलि दी थी।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे गणतंत्र का 75वां वर्ष कई अर्थों में देश की यात्रा का एक ऐतिहासिक पड़ाव है। हमारा देश स्वतंत्रता की शताब्दी की ओर बढ़ते हुए अमृत काल के प्रारंभिक दौर से गुजर रहा है। यह भारत अमृत काल को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

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