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नई दिल्ली8 मिनट पहले
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राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने शनिवार को पूर्व उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के पूर्व सभापति जगदीप धनखड़ के अचानक गायब होने पर चिंता जताई। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से इस मामले में बयान देने की मांग की।
सिब्बल ने कहा- ‘मुझे उनकी चिंता हो रही है। इस्तीफे के बाद से हमें उनकी कोई जानकारी नहीं है। पहले मैंने ‘लापता लेडीज’ के बारे में सुना था, लेकिन पहली बार है जब ‘लापता’ उपराष्ट्रपति के बारे में सुन रहा हूं।’
उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय को इस बारे में जरूर जानकारी होगी, इसलिए अमित शाह को इस पर बयान देना चाहिए। उन्होंने सवाल कि क्या हैबियस कॉर्पस याचिका दायर करनी पड़ेगी?
सिब्बल बोले- विपक्ष को धनखड़ की रक्षा करनी पड़ेगी
उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब लगता है विपक्ष को ही धनखड़ की सुरक्षा करनी पड़ेगी। सिब्बल ने बताया कि उन्होंने पहले फोन किया था, तो धनखड़ के पीए ने कहा कि वे आराम कर रहे हैं। इसके बाद से किसी ने फोन नहीं उठाया। कई नेताओं ने भी यही शिकायत की।
7 अगस्त को राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे पर चर्चा के लिए दी गई स्थगन सूचना को खारिज कर दिया। IUML सांसद अब्दुल वहाब ने इस मुद्दे पर नियम 267 के तहत चर्चा की मांग की थी।
धनखड़ ने 21 जुलाई को इस्तीफा दिया था
धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दिया था, जिसकी जानकारी 22 जुलाई को राज्यसभा में दी गई। हालांकि, कई विपक्षी नेताओं ने उनके इस्तीफे पर सवाल उठाए और आशंका जताई कि यह किसी राजनीतिक दबाव का नतीजा हो सकता है।
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा था कि सरकार को साफ बताना चाहिए कि उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया।
उन्होंने कहा था- ‘मुझे लगता है ‘दाल में कुछ काला है’। उनकी तबीयत ठीक है, वह हमेशा RSS और BJP का बचाव करते थे। देश को जानना चाहिए कि उनके इस्तीफे के पीछे कौन और क्या है।’
उपराष्ट्रपति के इस्तीफे की 2 थ्योरी
पहली: राष्ट्रपति को लिखे त्यागपत्र में धनखड़ ने पद छोड़ने की वजह स्वास्थ्य बताया था। दूसरी: विपक्ष इस्तीफे पर सवाल कर रहा है। कह रहा है कि इसकी वजह कुछ और है।
देश के पहले उपराष्ट्रपति जिनके खिलाफ महाभियोग लाया गया था
देश में 72 साल के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में धनखड़ पहले ऐसे राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति रहे, जिनके खिलाफ दिसंबर 2024 में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था। जो बाद में तकनीकी कारणों से खारिज हो गया था।
विपक्ष धनखड़ पर पक्षपात का आरोप लगाता रहा है। विपक्ष का दावा था कि वह सिर्फ विपक्ष की आवाज व उनके सांसदों द्वारा उठाए गए सवालों को दबाते हैं।
धनखड़ के पिछले कार्यकाल को देखें तो कई अहम पदों पर रहे, लेकिन वे अपना कार्यकाल पूरा होते नहीं देख पाए। एक बार विधायक के तौर पर उनके पांच साल एकमात्र अपवाद है।

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