भागवत बोले-दुनिया अर्थव्यवस्था नहीं भारतीय अध्यात्म को महत्व देती है: इसलिए हम विश्वगुरु, 3 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी भी बन गए तो आश्चर्य नहीं होगा

भागवत बोले-दुनिया अर्थव्यवस्था नहीं भारतीय अध्यात्म को महत्व देती है: इसलिए हम विश्वगुरु, 3 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी भी बन गए तो आश्चर्य नहीं होगा

भागवत बोले-दुनिया अर्थव्यवस्था नहीं भारतीय अध्यात्म को महत्व देती है:  इसलिए हम विश्वगुरु, 3 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी भी बन गए तो आश्चर्य नहीं होगा

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नागपुर22 मिनट पहले

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मोहन भागवत ने शुक्रवार को नागपुर में मंदिर दर्शन के दौरान आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को नागपुर में कहा- दुनिया भारत को उसके अध्यात्म (आध्यात्मिक ज्ञान) के लिए महत्व देती है। इसी वजह से हमें विश्वगुरु मानती है। दुनिया को इस बात से आश्चर्य नहीं है कि हमारी अर्थव्यवस्था कितनी तेजी से बढ़ रही है।

भागवत ने आगे कहा- अगर हम 3 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी भी बन जाए तो दुनिया को उसका आश्चर्य नहीं होगा। क्योंकि कई देश ऐसा कर चुके हैं। अमेरिका अमीर है, चीन भी अमीर बना है और कई अमीर देश हैं। कई चीजें हैं जो दूसरे देशों ने की हैं और हम भी करेंगे।

RSS चीफ ने कहा कि दुनिया के पास अध्यात्म और धर्म नहीं है जो हमारे पास है। दुनिया हमारे यहां इसके लिए आती है। इसमें जब हम बड़े बनते हैं तो सारी दुनिया हमको नमस्कार करती है और विश्वगुरु मानती है।

मोहन भागवत ने इकोनॉमी को लेकर ये बातें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने के ऐलान के 2 दिन बाद कही हैं। ट्रम्प ने टैरिफ से जुड़े एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए। अब भारत पर कुल 50% टैरिफ लगेगा।

मोहन भागवत की 2 बड़ी बातें…

  1. हम केवल त्योहार मनाने तक सीमित न रहें: भारत की अध्यात्म में उन्नति तब होगी, जब हम केवल त्योहार मनाने या पूजा करने तक सीमित न रहें। हमारा जीवन भगवान शिव की तरह निडर हो। उन्होंने अपने गले में सांप धारण कर लिया था।
  2. हमेशा अच्छाई बांटना चाहिए: भारत की महानता अच्छाई सभी को बांटने में है। हमारे पास जो अच्छाई है, उसे सभी के साथ साझा करना चाहिए। बुराई थोड़ी-बहुत होती है। उसे फैलाना नहीं चाहिए, बल्कि खुद में समेटकर खत्म करना चाहिए। अच्छाई को हमेशा बांटना चाहिए।

भागवत बोले थे- दुनिया को विविधता अपनाने वाले धर्म की जरूरत

RSS चीफ मोहन भागवत ने 6 अगस्त को नागपुर में ही कहा था- दुनिया को उस धर्म की जरूरत है जो विविधताओं को अपनाए, जैसे कि हिंदू धर्म। उन्होंने कहा कि धर्म हमें अपनापन और विविधताओं को स्वीकार करना सिखाता है।

उन्होंने आगे कहा था- हम विविध हैं, लेकिन अलग नहीं हैं। अंतिम सत्य यह है कि हम अलग दिख सकते हैं, लेकिन वास्तव में हम एक ही हैं।’ पूरी खबर पढ़ें…

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