नई दिल्ली3 घंटे पहलेलेखक: सुजीत ठाकुर

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यह मिशन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की संयुक्त पहल है। तस्वीर- AI जनरेटेड

केंद्र सरकार देश के 26 करोड़ स्कूली बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत स्कूल में ही जांचने जा रही है। आयुष्मान भारत स्कूल स्वास्थ्य मिशन का पहला ट्रायल त्रिपुरा में सफल रहा है।

इसके तहत 30 पैरामीटर पर स्कूल में ही 18 साल तक के बच्चों की स्वास्थ्य मॉनिटरिंग की गई। इनमें चोट, हिंसा, बेइज्जती, असुरक्षित संबंध, मानसिक और भावनात्मक डिसऑर्डर, आक्रामकता, हडि्डयों के विकार, दुबलापन-मोटापा, आंखों की रोशनी, त्वचा रोग, खून की कमी आदि की जांच-परख हुईं।

इससे बच्चों की समय पर काउंसलिंग और मेडिकल जांचों की राह खुली। इसलिए अब इसे देशभर में लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि 34 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 388 जिलों के 30 हजार स्कूलों में 1.50 करोड़ बच्चों पर भी ट्रायल चल रहे हैं। इसके परिणाम आने हैं।

यह मिशन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की संयुक्त पहल है, जिसे चरणबद्ध रूप से देशभर के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में लागू किया जाना है। शुरुआत छोटे राज्यों से होगी।

इन राज्यों में इसी वित्त वर्ष में लागू होगी योजना दोनों मंत्रालयों से जुड़े अधिकारियों की मानें तो कुछ छोटे राज्यों जैसे पुद्दुचेरी, चंडीगढ़, मेघालय और मिजोरम जैसे राज्यों में चालू वित्त वर्ष के दौरान यह योजना लागू होगी, क्योंकि इन राज्यों में स्कूलों की मैपिंग आसान है।

देशभर में इसे लागू करने से पहले कुछ तकनीकी व व्यवहारिक समस्याएं दूर की जानी हैं। जैसे- हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर नामित करने में कहीं महिला और पुरुष शिक्षकों की पर्याप्त संख्या में कमी, वांक्षित उम्र (45 साल तक) का नहीं होना, वेलनेस डे (मंगलवार) का संतुलन नहीं बनना आदि।

आयुष्मान स्कूल मिशन क्या है, 4 पॉइंट

  • आयुष्मान स्कूल मिशन के तहत देशभर के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जाती है। इसमें आंखों, दांतों, त्वचा, पोषण और अन्य सामान्य रोगों की जांच शामिल होती है।
  • प्रत्येक छात्र की एक डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड प्रोफाइल तैयार की जाती है, जिससे उसकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ट्रैक किया जा सके।
  • अगर किसी छात्र में कोई बीमारी या कमी पाई जाती है, तो उसे नजदीकी सरकारी अस्पताल या विशेषज्ञ केंद्रों में रेफर किया जाता है, ताकि समय पर इलाज मिल सके।
  • मिशन के तहत बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली, स्वच्छता, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी दी जाती है, जिससे वे खुद जागरूक बनें।

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