MP STSF ने ताशी शेरपा को सिलिगुड़ी के एक ओवरब्रिज से गिरफ्तार किया था।

.

ये बताते हुए एमपी एसटीएसएफ (स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स) के एक अधिकारी रोमांचित हो जाते हैं। वो उस टीम का हिस्सा थे, जिसने इंटरनेशनल वाइल्ड लाइफ तस्कर ताशी शेरपा को गिरफ्तार किया था। शेरपा इस समय नर्मदापुरम की जेल में बंद है। इस बार उसके सुर्खियों में आने की वजह इंटरपोल (इंटरनेशनल क्रिमिनल पुलिस ऑर्गेनाइजेशन) है, जिसने एसटीएसएफ से उसकी जानकारी मांगी है।

इंटरपोल ने ताशी के खिलाफ 2015 से ही नोटिस जारी किया था, लेकिन वो गिरफ्तार नहीं हो सका था। एमपी एसटीएसएफ ने न केवल उसे पकड़ा बल्कि सजा भी दिलाई।

आखिर ताशी के बारे में एमपी एसटीएसएफ को कैसे पता चला? उसे कैसे पकड़ा गया?

इस ऑपरेशन में कितना रिस्क था?

इन सवालों का जवाब जानने के लिए दैनिक भास्कर ने ताशी शेरपा को पकड़ने वाली टीम के सदस्यों से बात की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

मध्यप्रदेश को क्यों थी ताशी की तलाश साल 2015 में एमपी एसटीएसएफ ने एक ऐसे गिरोह के 10 सदस्यों को पकड़ा था, जिसने सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में एक बाघ का शिकार किया था। ये गिरोह उस समय पकड़ा गया, जब वह एक और बाघ का शिकार करने टाइगर रिजर्व में दाखिल हुआ था। वहां के महावतों ने उसे देखा और एसटीएसएफ को सूचना दी।

गिरोह से पूछताछ में पता चला कि इन्होंने बाघ के अंगों को इटारसी के शेख युनूस को बेचा है। शेख युनूस ने अंतरराष्ट्रीय तस्कर ताशी शेरपा को इटारसी बुलाया था। एसटीएसएफ को पहली बार ताशी शेरपा के बारे में पता चला था। मोबाइल टावर की लोकेशन के आधार पर एसटीएसएफ ने ये भी साबित किया कि दोनों के बीच इस सौदे को लेकर कई दौर की बातचीत हुई थी।

एसटीएसएफ ने इस पूरे केस में 36 लोगों को आरोपी बनाया था। छिंदवाड़ा, बैतूल, नर्मदापुरम समेत अन्य जिलों से 27 लोगों को गिरफ्तार किया था। मगर, गिरोह के मास्टरमाइंड जेई तमांग और ताशी शेरपा समेत 7 लोग फरार थे।

9 साल बाद दार्जिलिंग में मिला सुराग एमपी एसटीएसएफ प्रभारी रितेश सिरोठिया बताते हैं- 2015 में ही इंटरपोल ने तमांग और ताशी के खिलाफ नोटिस जारी किया था। उसे पकड़ने के लिए इंटरपोल, वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल से लेकर कई देशों की एजेंसियों से एसटीएसएफ की बातचीत होती रही। इंटरपोल और इंटरनेशनल एजेंसियों की मदद से ये पता चल गया था कि वह दार्जिलिंग के रास्ते नेपाल और भूटान आना-जाना करता है।

इसके बाद हमने भूटान और नेपाल की एजेंसियों से संपर्क किया। एसटीएसएफ की टीम कम से कम एक दर्जन बार उस इलाके में गई। रेकी करने के साथ स्थानीय सूत्र तैयार किए। जनवरी 2024 को टिप मिली कि ताशी दार्जिलिंग में भूटान सीमा के पास छिपा है। इस टिप के मिलने के बाद एसटीएसएफ ने उसे पकड़ने का प्लान तैयार किया।

टीम पहुंची तो भूटान निकल गया ताशी ताशी को पकड़ने गई टीम के एक सदस्य बताते हैं- जब हम लोग वहां पहुंचे तो पता चला कि ताशी भूटान निकल गया है। उसे हम भूटान जाकर नहीं पकड़ सकते थे। ऐसे में हम लोगों ने स्थानीय एजेंसियों से संपर्क किया। हमने पहले जो सूत्र तैयार किए थे, उन्हें एक्टिव किया। ये बताया कि जैसे ही ताशी बॉर्डर क्रॉस कर दार्जिलिंग आए तो अलर्ट करें।

हमें लगा था कि एक या दो दिन में ताशी वापस लौटेगा, लेकिन 10 दिन बीत गए। इस दौरान हम लोग टूरिस्ट बनकर उसके आने का इंतजार करते रहे। 11वें दिन उसके आने की खबर मिली। हम लोगों ने उसे पकड़ने के लिए घेराबंदी की। जब वह सिलिगुड़ी के एक ओवरब्रिज के पास पहुंचा तो उसे गिरफ्तार कर लिया।

ताशी को दार्जिलिंग से गिरफ्तार कर एमपी लाया गया। यहां उसे कोर्ट में पेश किया था।

ताशी को दार्जिलिंग से गिरफ्तार कर एमपी लाया गया। यहां उसे कोर्ट में पेश किया था।

फोरेंसिक यूनिवर्सिटी में हुआ पॉलीग्राफ, ब्रेन मैपिंग सहायक जिला अभियोजन अधिकारी अरुण पठारिया बताते हैं कि ताशी सीधे तौर पर शिकार में शामिल नहीं था। मगर, उसके कहने पर शिकार किया जाता था। ऐसे में शिकार करवाने में उसकी भूमिका को कोर्ट में साबित करना चुनौती थी। हमने उसकी ब्रेन मैपिंग और पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग की।

कोर्ट की अनुमति के बाद ताशी को नर्मदापुरम जेल से विशेष सुरक्षा में गुजरात की फोरेंसिक यूनिवर्सिटी ले जाया गया, जहां उसके दोनों महत्वपूर्ण टेस्ट कराए गए।

ताशी और तमांग ऑर्डर पर करवाते थे शिकार चीन के तिब्बत का रहने वाला ताशी शेरपा खुद को जड़ी-बूटी का व्यापारी बताता था। एडीपीओ अरुण पठारिया कहते हैं- उसकी कद काठी की वजह से वह नेपाल और भूटान के लोगों के बीच आसानी से घुल-मिल जाता था। उसे बॉर्डर पार करने में दिक्कत नहीं होती थी। भारत-नेपाल और भूटान की बॉर्डर पर बहुत सख्ती नहीं होती, इसकी आड़ में वह वन्यजीवों के अंगों की तस्करी करता था।

तमांग उसका बॉस है, जो फरार है। ये ऑर्डर पर बाघ या पेंगोलिन का शिकार करवाते थे। एमपी में पारदी गिरोह बेहद कम पैसों में बाघ के शिकार के लिए तैयार हो जाते हैं। शिकार के बाद बाघ की खाल और अंगों को गुपचुप तरीके से बॉर्डर तक ले जाते थे।

तमांग गिरफ्तार हुआ, मगर जमानत पर छूट गया ताशी शेरपा के बॉस जेई तमांग को एसटीएसएफ ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था। उसके पास से बाघ की हड्डियां और पेंगोलिन की खोपड़ी मिली थीं। मगर कोर्ट में ये साबित ही नहीं हो सका और उसे जमानत मिल गई। उसके बाद से वह फरार है।

उसकी लिव-इन-पार्टनर लाचुंगपा यानचेन को भी इसी तरह 15 सितंबर 2017 को गिरफ्तार किया था। गंगटोक कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद वह भी फरार है। इन दोनों के अलावा पांच और तस्कर फरार हैं, जिनके खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। इंटरपोल ताशी शेरपा की जानकारी जुटाकर इस पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।

इंटरपोल ने जानकारी मांगने के साथ एमपी एसटीएसएफ के अफसरों की तारीफ भी की है। इस तारीफ के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- इंटरनेशनल वाइल्डलाइफ क्राइम के नेटवर्क को तोड़ने में मिली सफलता के लिए स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स के अधिकारियों का सरकार की ओर से सम्मान किया जाएगा।

मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढे़ं…

तंत्र क्रिया के लिए टाइगर के शिकार की कहानी

मध्यप्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में साल 2015 में हुए दो बाघ, पेंगोलिन के शिकार और खाल, अंगों को बेचने के मामले में 7 साल बाद 20 दिसंबर को फैसला आया। कोर्ट ने 27 आरोपियों को दोषी मानकर 5-5 साल के लिए जेल भेज दिया। इंटरनेशनल तस्कर जेई तमांग के खिलाफ 2016 से रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। पढ़ें पूरी खबर…

बाघ-पेंगोलिन तस्कर का पॉलिग्राफ टेस्ट बाघ और पेंगोलिन के अंगों की इंटरनेशनल स्तर पर तस्करी के आरोपी का पॉलिग्राफ टेस्ट किया जाएगा। तस्कर ताशी शेरपा के पॉलिग्राफ और ब्रेन मैपिंग टेस्ट के लिए नर्मदापुरम की विशेष कोर्ट ने अनुमति दे दी है। 23 मार्च तक गुजरात फॉरेंसिक लैब में उसका टेस्ट होगा। पढ़ें पूरी खबर…



Source link