चंबा में भरमौर से मणिमहेश को उड़ान भरते हुए हेली टैक्सी
उत्तर भारत की पावन एवं पवित्र मणिमहेश यात्रा के लिए हेली टैक्सी सेवा शुरू करने के लिए डीजीसीए (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) की टीम आज (गुरुवार को) भरमौर पहुंचेगी। डीजीसीए की टीम भरमौर और गौरीकुंड स्थित हेलीपैड का निरीक्षण करेगी। साथ ही हवाई उड़ानों की स
.
निरीक्षण के बाद केंद्रीय टीम अपनी रिपोर्ट नागरिक उड्डयन महानिदेशालय को सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर डीजीसीए भरमौर से मणिमहेश यात्रा के दौरान हेली टैक्सी सेवा की अनुमति प्रदान करेगा।
9 अगस्त से हैली टैक्सी सेवा शुरू करने का फैसला
प्रशासन ने मणिमहेश यात्रा में हेली टैक्सी सेवा 9 अगस्त से शुरू करने का फैसला लिया है और 31 अगस्त तक चलेगी। इस सेवा को शुरू करने से पहले डीजीसीए और रक्षा मंत्रालय की अनुमति लेना आवश्यक है।
भरमौर के गौरीकुंड में हेली टैक्सी
2 कंपनियों के हैलीकॉप्टर भरमौर पहुंचे
हेली टैक्सी सेवा प्रदान करने वाली 2 कंपनियों- हिमालयन हेली सर्विस और रजस एयरो स्पोर्ट्स के एक-एक हैलीकॉप्टर बुधवार को भरमौर स्थित हेलीपैड पर पहुंच गए हैं।
मणिमहेश यात्रा 16 अगस्त से शुरू हो रही
बता दें कि] मणिमहेश यात्रा आधिकारिक तौर पर 16 अगस्त से शुरू हो रही है। इस यात्रा में देश के सैकड़ों श्रद्धालु भाग लेते हैं। ज्यादातर श्रद्धालु पैदल इस यात्रा को पूरा करते है। मगर अब हेली टैक्सी से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मणिमहेश पहुंचते हैं।
बीते साल 8 लाख श्रद्धालु पहुंचे
एडीएम कुलविंदर राणा ने बताया, बीते साल करीब 8 लाख श्रद्धालु मणिमहेश यात्रा पर पहुंचे थे। यह यात्रा मौसम पर काफी निर्भर रहती है। खराब मौसम में भरमौर से मणिमहेश के लिए फ्लाइट भी नहीं उड़ पाती।

मणिमहेश की डल झील में स्नान के लिए पहुंचे भगवान भोले के भक्त (फाइल शॉट)
भरमौर से गौरीकुंड तक उड़ता है हेलिकॉप्टर
हेलिकॉप्टर भरमौर से गौरीकुंड तक उड़ता है। यहां से डेढ़ किलोमीटर पैदल या घोड़ों पर जाना पड़ता है। भरमौर से गौरीकुंड की दूरी 13 किलोमीटर है। ज्यादातर श्रद्धालु मणिमहेश के लिए पैदल पहुंचते हैं।
पिछले साल 4300 रुपए था हेलिकॉप्टर का किराया
एक हेलिकॉप्टर में छह यात्री सफर करते हैं। साल 2023 में भरमौर से मणिमहेश का किराया 3875 रुपए और 2024 में 4300 रुपए था। इस बार का आज या कल में किराया फाइनल कर दिया जाएगा।
उत्तर भारत की कठिन धार्मिक यात्रा
मणिमहेश यात्रा को उत्तर भारत की कठिन धार्मिक यात्रा माना जाता है। 13 हजार फुट से ज्यादा की ऊंचाई पर स्थिति मणिमहेश पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को ऊंचे-ऊंचे पहाड़ चढ़ने पड़ते हैं। यह यात्रा अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सुंदर दृश्यों के लिए भी जानी जाती है, क्योंकि इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को घने जंगलों, अल्पाइन घास के मैदानों और चट्टानों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है।
इस दौरान हिमालय का मनमोहक दृश्य भी देखने को मिलता हैं। यही वजह है कि यह आध्यात्मिक यात्रा रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का भी आभास कराती है।
मणिमहेश के कैलाश शिखर में शिव का निवास
मान्यता है कि भगवान शिव मणिमहेश के कैलाश शिखर पर निवास करते हैं, जो झील से दिखाई देता है। माना जाता है कि यह यात्रा 9वीं शताब्दी में शुरू हुई थी, जब एक स्थानीय राजा, राजा साहिल वर्मन को भगवान शिव के दर्शन हुए थे, जिन्होंने मणिमहेश झील पर एक मंदिर स्थापित करने का निर्देश दिया।