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नई दिल्ली18 मिनट पहले
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प्रोटेस्ट मार्च के दौरान राहुल-प्रियंका समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।
वोटर वेरिफिकेशन और चुनाव में वोट चोरी के आरोप पर विपक्ष के 300 सांसदों ने सोमवार को संसद से चुनाव आयोग के ऑफिस तक मार्च निकाला। इस दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया गया। पुलिस उन्हें संसद मार्ग पुलिस स्टेशन ले गई, जहां से 2 घंटे बाद रिहा कर दिया गया।
हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि यह संविधान बचाने की लड़ाई है। ये एक व्यक्ति-एक वोट की लड़ाई है, इसलिए हमें साफ वोटर लिस्ट चाहिए। वहीं प्रियंका गांधी ने कहा कि यह सरकार डरी हुई है और कायर है।
मार्च के दौरान अखिलेश ने बैरिकेडिंग फांदकर आगे बढ़ने की कोशिश की। जब सांसदों को आगे नहीं जाने दिया गया तो वे जमीन पर बैठ गए। प्रियंका, डिंपल समेत कई सांसद ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ के नारे लगाते दिखे।
प्रदर्शन के दौरान TMC सांसद मिताली बाग और महुआ मोइत्रा की तबीयत बिगड़ गई। बेहोश हो गईं। राहुल गांधी और अन्य सांसदों ने उनकी मदद की। इससे पहले दोनों सदनों में इस मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ।

दिल्ली पुलिस बोली- सांसदों ने मार्च के लिए अनुमति नहीं मांगी
मार्च संसद के मकर द्वार से शुरू हुआ। सांसदों के हाथों में ‘वोट बचाओ’ के बैनर थे। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने कहा था कि इंडिया ब्लॉक ने मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं मांगी है, इसलिए इलेक्शन कमीशन जाने से पहले ही मार्च को परिवहन भवन के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया गया।
संसद से लेकर सांसदों की हिरासत तक की तस्वीरें…

लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई तो विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। सदन 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया।

सुबह 11.30 बजे करीब 300 सांसद संसद के मकर द्वार पर इकट्ठा हुए। राष्ट्रगान गाकर विरोध मार्च की शुरुआत की।

मार्च को परिवहन भवन के पास सभी सांसदों को रोक दिया गया। राहुल-वेणुगोपाल की पुलिस से बहस हुई, अखिलेश बैरिकेडिंग फांदकर निकल गए।

टीएमसी सांसद मिताली बाग की तबीयत खराब होने पर राहुल गांधी ने उनकी मदद की।

TMC सांसद मिताली बाग बेहोश हो गईं। राहुल ने उन्हें दवाई खिलाई।

मार्च के दौरान टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा बेहोश हो गई थीं।

प्रदर्शन के बाद धरने पर बैठे सांसदों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इन्हें 2 बसों में बैठाकर संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में लाया गया।
वोटर वेरिफिकेशन को लेकर राहुल ने चुनाव आयोग से सवाल किए…
7 अगस्त: राहुल का आरोप- EC ने BJP के साथ चुनाव चुराया
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर 1 घंटे 11 मिनट तक 22 पेज का प्रेजेंटेशन दिया। राहुल ने स्क्रीन पर कर्नाटक की वोटर लिस्ट दिखाते हुए कहा कि वोटर लिस्ट में संदिग्ध वोटर मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के नतीजे देखने के बाद हमारा शक पुख्ता हुआ कि चुनाव में चोरी हुई है। मशीन रीडेबल वोटर लिस्ट नहीं देने से हमें भरोसा हुआ कि चुनाव आयोग ने भाजपा के साथ मिलकर महाराष्ट्र के चुनाव की चोरी की है।
राहुल ने कहा कि हमने यहां वोट चोरी का एक मॉडल पेश किया, मुझे लगता है कि इसी मॉडल का प्रयोग देश की कई लोकसभाओं और विधानसभाओं में हुआ। राहुल के आरोपों पर कर्नाटक चुनाव आयोग ने शपथ पत्र मांगा है। कहा कि वे लिखित में शिकायत करें ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।
8 अगस्त: EC ने कहा कि राहुल के दावे सही तो शपथ पत्र साइन करें
चुनाव आयोग ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से कहा है कि वे वोट चोरी के अपने दावे को सही मानते हैं तो हलफनामे पर साइन करके दें। अगर उन्हें अपने दावों पर भरोसा नहीं है तो देश से माफी मांगें।
न्यूज एजेंसी ANI ने चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से इसकी जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक, राहुल मानते हैं कि चुनाव आयोग पर उनके आरोप सही हैं, तो उन्हें शपथपत्र पर हस्ताक्षर करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
इधर, राहुल ने कर्नाटक के बेंगलुरु में फ्रीडम पार्क में आयोजित ‘वोट अधिकार रैली’ के दौरान कहा कि चुनाव आयोग मुझसे हलफनामा मांगता है। वो कहता है कि मुझे शपथ लेनी होगी। मैंने संसद में संविधान की शपथ ली है। राहुल ने कहा-
आज जब देश की जनता हमारे डेटा को लेकर सवाल पूछ रही है तो चुनाव आयोग ने वेबसाइट ही बंद कर दी। EC जानता है कि जनता उनसे सवाल पूछने लगी तो उनका पूरा ढांचा ढह जाएगा।


10 अगस्त: चुनाव आयोग ने राहुल से सबूत मांगे
कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को नोटिस भेजकर उनके वोट चोरी वाले बयान पर सबूत मांगे। राहुल ने 7 अगस्त को आरोप लगाया था कि महादेवपुरा विधानसभा सीट पर 1 लाख से ज्यादा वोट चोरी हुए हैं और एक महिला ने दो बार मतदान किया।
CEO ने रविवार 10 अगस्त को कांग्रेस नेता को भेजे लेटर में लिखा कि राहुल ने प्रेजेंटेशन में जो दस्तावेज और स्क्रीन शॉट दिखाए, वे चुनाव आयोग के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते।
बिहार SIR विवाद को ग्राफिक्स में समझिए…
