मथुरा के वृंदावन में नाव हादसे में 11 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। अब तक 22 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। 30 घंटे से ज्यादा बीत जाने के बाद भी 5 लोग लापता हैं। रविवार को तीसरे दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। आर्मी समेत 250 लोगों की टीम ऑपरेशन में लगी हुई है। जांच का दायरा 14 से बढ़ाकर 20 किमी. कर दिया गया है। इससे पहले शनिवार को एक शव देवरहा बाबा घाट के पास से बरामद किया गया। बेटे की लाश देखकर बुजुर्ग पिता फफक पड़े। युवक की 6 महीने पहले सगाई हुई थी। 12 सितंबर को शादी होनी थी। पुलिस ने आरोपी नाविक पप्पू निषाद और ठेकेदार नारायण शर्मा को जेल भेज दिया है। हादसे के 6 घंटे बाद यानी शुक्रवार रात 9 बजे उसे हिरासत में लिया गया था। उसी ने अपनी नाव में श्रद्धालुओं को जुगल घाट से बैठाया था। हादसे के बाद वह फरार हो गया था। बाकी लापता अब तक क्यों नहीं मिल पाए? इस सवाल पर रेस्क्यू में जुटे अफसर ने बताया कि यमुना का बहाव तेज है, इसलिए लोग बहकर दूर जा सकते हैं। नदी में गाद (कीचड़) और रेत में शव दबे हो सकते हैं, जो खुद फूलकर ऊपर आ सकते हैं। हादसा शुक्रवार दोपहर 3 बजे केसी घाट पर हुआ, जहां 38 श्रद्धालुओं से भरी नाव पलट गई थी। घाट बांके बिहारी मंदिर से करीब 2 किमी दूर है। मृतकों में मां-बेटे, चाचा-चाची और बुआ-फूफा समेत एक ही परिवार के 7 लोग शामिल हैं। जिस जगह हादसा हुआ, वहां 25 फीट गहरा पानी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि नाव की क्षमता 40 श्रद्धालुओं की थी। किसी भी श्रद्धालु को नाविक ने लाइफ जैकेट नहीं दी थी। पांटून पुल की रिपेयरिंग कर रहे लोगों और अन्य नाविकों ने कुछ लोगों को बचाया। बाद में प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और रेस्क्यू शुरू किया। वहीं, हादसे से जुड़े 2 वीडियो सामने आए हैं। पहला- नाव डूबने से 15 मिनट पहले का है। इसमें लोग राधे-राधे का जप कर रहे हैं। दूसरा- श्रद्धालुओं के नदी में डूबने का है। रेस्क्यू की तस्वीरें देखिए- पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स 1. देवरहा बाबा घाट पर एक और बॉडी मिली, 11 मौतें, 5 अब भी लापता 2. नाविक और पांटून पुल के ठेकेदार को जेल भेजा 3. आगरा जोन के कमिश्रर बोले-24 घंटे में कमेटी रिपोर्ट देगी 4. वृंदावन नाव हादसे के बाद काशी में भी अलर्ट 5. बीती 6 अप्रैल को पांटून पुल को हटाने की परमिशन मांगी गई, लेटर सामने आया अब पढ़िए, कैसे हुआ हादसा? हादसे में जिंदा बचे युवक ने बताया- नाव तट से करीब 50 फीट दूर यमुना नदी के बीच में थी। उस वक्त हवा करीब 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। तेज हवा के कारण नाव अचानक डगमगाने लगी। नाविक का नियंत्रण छूट गया। पर्यटकों ने नाविक से कहा कि पुल आने वाला है, नाव रोक लीजिए, लेकिन उसने नहीं सुनी। दो बार नाव पीपा पुल से टकराने से बची, लेकिन तीसरी बार टक्कर हो गई और नाव डूब गई। हादसा कहां हुआ, ग्राफिक्स से समझिए… सभी श्रद्धालु शुक्रवार सुबह वृंदावन पहुंचे थे गुरुवार (9 अप्रैल) को लुधियाना के जगराओं स्थित श्री बांके बिहारी क्लब की ओर से 2 बसों में 130 श्रद्धालुओं को ले जाया गया था। इनमें से 90 श्रद्धालु जगराओं से थे और बाकी अन्य शहरों से। यह वृंदावन की 4 दिन की यात्रा थी। मृतकों में मधुर बहल, उनकी मां कविता बहल, चाचा चरणजीत, चाची पिंकी बहल, बुआ आशा रानी, दूसरी बुआ अंजू गुलाटी और फूफा राकेश गुलाटी शामिल हैं। घटना से जुड़ी पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…



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