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- Hindu Widow Property Rights; Supreme Court Husband Family | Gotra Kanyadaan
नई दिल्ली6 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि हिंदू समाज में कन्यादान की परंपरा है, जिसके तहत जब एक महिला शादी करती है, तो उसका गोत्र (कुल या वंश) भी बदल जाता है। ऐसे में बिना वसीयत के मरने वाली विधवा और निसंतान हिंदू महिला की संपत्ति उसके पति के परिवार को मिलेगा, न कि उसके मायके वालों को।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 15(1)(बी) को चुनौती दी गई है। इस अधिनियम के तहत, अगर किसी विधवा और निसंतान हिंदू महिला की बिना वसीयत के मौत हो जाती है, तो उसकी संपत्ति उसके ससुरालवालों को मिल जाती है।
सुप्रीम कोर्ट की एकमात्र महिला जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा- हमारे हिंदू समाज की जो संरचना पहले से है, उसे नीचा मत दिखाइए। महिलाओं के अधिकार जरूरी हैं, लेकिन सामाजिक संरचना और महिलाओं को अधिकार देने के बीच बैलेंस होना चाहिए।

दो मामले, जिनमें पति का परिवार संपत्ति पर दावा कर रहा सुप्रीम कोर्ट को दो मामलों के बारे में बताया गया। पहले केस में एक युवा दंपत्ति की कोविड-19 के कारण मौत हो गई। इसके बाद, पति और पत्नी, दोनों की मां ने उनकी संपत्ति पर दावा कर दिया।
एक ओर, पुरुष की मां का दावा है कि दंपत्ति की पूरी संपत्ति पर उसका अधिकार है, जबकि महिला की मां अपनी बेटी की संचित संपत्ति और प्रॉपर्टी पर अधिकार चाहती है।
दूसरे मामले में, एक दंपत्ति की मौत के बाद, पुरुष की बहन उनकी छोड़ी हुई संपत्ति पर दावा कर रही है। दंपत्ति की कोई संतान नहीं थी। वकील ने कहा यह जनहित का मामला है और इसमें सुप्रीम कोर्ट के दखल की जरूरत है।