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नई दिल्ली10 मिनट पहलेलेखक: मुकेश कौशिक
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AMCA को इंडियन एयरफोर्स और नेवी में तैनात किए जाने की योजना है। हालांकि यह 2035 तक ही उपलब्ध हो सकेगा।
टैरिफ वॉर की तल्खी के बीच भारत की विमान निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के बीच जेट इंजन को लेकर कई रक्षा सौदे फाइनल स्टेज में हैं।
एचएएल सूत्रों के मुताबिक सबसे बड़ा सौदा जेट जीई 414 इंजन का होने जा रहा है। यह इंजन भारत के 5वीं पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान एम्का (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) में लगेगा।
जीई ने इस इंजन की 80% तकनीकी ट्रांसफर की HAL की शर्त मान ली है। सौदे में यह तय होना है कि जीई इस इंजन के बाकी पार्टनर्स के साथ तकनीक ट्रांसफर की सहमति खुद लेगी या HAL को बातचीत में सहयोग देगी।
इस करार के बाद जीई-414 इंजन का प्रोडक्शन भारत में हो सकेगा। एचएएल 10 जीई-414 इंजन खरीद चुकी है ताकि एम्का का विकास न रुके।

अक्टूबर में वायुसेना को मिलेंगे दो तेजस एमके1
कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति ने 19 अगस्त को वायुसेना के लिए 97 तेजस एलसीए एमके1 विमानों की खरीद को मंजूरी दी। इस पर 66500 करोड़ खर्च होंगे। इसके लिए एलएएच 113 इंजन जीई से खरीद रही है। इसके पहले 83 एलसीए एमके1 का ऑर्डर एलएएच के पास है।
इस सौदे के 2 विमान अक्टूबर में वायुसेना को सौंपे जाएंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नासिक में इन विमानों का वायुसेना को देंगे। सूत्रों ने बताया कि यह फाइटर हवा से सतह से मार करने वाली शॉर्ट रेंज से लेकर बियोंड विजुअल रेंज की मिसाइलों से लैस हैं और इनकी परीक्षण उड़ानें हो चुकी हैं।
एचएएल की दो प्रोडक्शन लाइनें बेंगलुरु में हैं, जबकि एक अत्याधुनिक लाइन नासिक में बनाई गई है। एक और एसेंबली लाइन बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके बाद एचएएल साल में 24 एलसीए विमान तैयार करने की स्थिति में आ गई है।

तेजस के 113 इंजन के सौदे में टैरिफ वॉर रुकावट नहीं
सूत्रों ने भास्कर को बताया कि तेजस एमके1 के लिए 8500 करोड़ रु. में जीई 113 जेट इंजन देगी। इसके लिए जीई ने भरोसा दिलाया है कि टैरिफ वॉर की आंच इस सौदे पर नहीं आने दी जाएगी। इससे पहले 2021 में 99 एफ 404 जीई-अइार्एन 20 इंजनों का सौदा 5500 करोड़ में हुआ था। इस तरह अमेरिका से अब तक 14 हजार करोड़ के 212 इंजन की डील हो चुकी है।