दीपोत्सव इस साल भी 2024 की तरह छह दिन मनाया जाएगा। दीपावली की तारीख पर इस साल 2024 की तरह मतभेद नहीं है। 18 अक्टूबर को धरतेरस के साथ दीपोत्सव की शुरुआत हो जाएगी। दीपावली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस बार ये पर्व छह दिन ही मनाया जाएगा।
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इन छह दिनों को लेकर दैनिक भास्कर ने सर्वेश्वर जयादित्य पंचांग के संपादक पं. अमित शर्मा और आचार्य मुदित से बात की। उन्होंने त्योहार की तारीख, धनतेरस पर राशियों के अनुसार खरीदारी और पूजा के शुभ मुहूर्त के बारे में जानकारी दी।
15 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र का महा संयोग बन रहा पं. अमित शर्मा और आचार्य मुदित ने बताया- इस बार 15 अक्टूबर को कार्तिक कृष्ण नवमी को पुष्य नक्षत्र का महा संयोग बन रहा है। इस दिन खरीदारी बहुत शुभ मानी जाती है। इसी दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग होने से और भी शुभ हो गई है। 15 अक्टूबर को सूर्योदय से लेकर शाम 4:25 बजे तक पुष्य नक्षत्र रहेगा। इस दिन वाहन, वस्त्र, आभूषण, बहीखाते खरीदना शुभ होगा।
पांच दिनों का दीपोत्सव इस बार 6 दिनों का हो गया है। जो 18 अक्टूबर को धनतेरस के साथ शुरू हो रहा है। दीपावली के बाद 23 अक्टूबर तक रहेगा। खरीदारी के बहुत खास शुभ योग बन रहे हैं। इनमें राशि के अनुसार खरीदारी भी शुभ मानी जाती है।
धनतेरस पर उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में खरीददारी व्यवसाय को बढ़ाएगा धनतेरस या धन्वंतरि जयंती (18 अक्टूबर) के दिन दीपावली की खरीदारी का सबसे बम्पर मुहूर्त है। कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी और धन्वंतरि एक साथ प्रकट हुए थे। तब से यह तिथि भारत में लक्ष्मी पूजा और चिकित्सक दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस बार धनतेरस को पूर्वाफाल्गुनी और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का योग बन रहा है। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र शाम को 5:09 बजे शुरू होगा। यह सूर्य का प्रभावशाली नक्षत्र है। जो शक्ति, आत्मबल और व्यवसाय को बढ़ाता है।



रूप चतुर्दशी पर चार बत्तियों वाला दीपक जलाएं 19 अक्टूबर को रूप चौदस होगी। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नाम के दैत्य का वध किया था। इस दिन दरवाजे के बाहर सूर्यास्त के बाद चार बत्तियों वाला दीपक जलाया जाता है। मान्यता है कि इससे नरक नहीं जाना पड़ता। रूप चौदस पर उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है।
20 अक्टूबर को दीपावली इस साल दीपावली 20 अक्टूबर को है। इस साल दीपावली को लेकर पिछले साल जैसा भ्रम नहीं है। 20 अक्टूबर को दोपहर 2:27 बजे अमावस्या शुरू हो जाएगी, इसके बाद प्रदोषकाल व मध्यरात्रि में अमावस्या होने से इस दिन दीपावली और लक्ष्मी पूजन किया जाएगा।
जयादित्य पंचांग के संपादक पं अमित शर्मा ने बताया- दीपावली में लक्ष्मी पूजा के 3 काल सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं। प्रदोष काल, वृषभ लग्न और सिंह लग्न। सूर्यास्त के 72 मिनट बाद तक प्रदोषकाल होता है। लगभग इसी समय में वृषभ लग्न आता है। ढलती रात में सिंह लग्न आता है। प्रदोषकाल और वृषभ लग्न में पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त होता है।

21 अक्टूबर को कार्तिक अमावस्या 21 अक्टूबर को अमावस्या तिथि दोपहर 3:56 बजे तक रहेगी। इस दिन पितरों का श्राद्ध एवं दान पुण्य करना चाहिए। सूर्यास्त के बाद प्रदोषकाल में अमावस्या नहीं होने से इस दिन दीपावली लक्ष्मीपूजा का मुहूर्त नहीं मिलेगा।
22 अक्टूबर को गोवर्धन और अन्नकूट महोत्सव 22 अक्टूबर को कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन अन्नकूट और गोवर्धन पूजा होगी। भगवान कृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाएं।
23 अक्टूबर को भाईदूज 23 अक्टूबर को भाईदूज मनाई जाएगी। इस दिन बहन भाई का तिलक करती हैं। भाई बहन के घर भोजन करते हैं। इस दिन यमतर्पण, चित्रगुप्त सहित यमपूजन, यमुनास्नान भी किया जाता है। शाम 7:50 बजे तक पूरे दिन भाईदूज मनाई जाएगी।

(नोट- पंचांग सम्बन्धी सभी जानकारियां जयादित्य पंचांग, जयपुर से ली गई हैं।)