नई दिल्ली35 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
22 अगस्त को जस्टिस विक्रम नाथ,जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की स्पेशल बेंच ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में फैसला सुनाया था।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ ने शनिवार को कहा कि, मैं लंबे समय से कानून जगत में अपने छोटे-मोटे कामों के लिए जाना जाता था। मैं आवारा कुत्तों का आभारी हूं, जिन्होंने मुझे न केवल देश में बल्कि दुनियाभर में फेमस कर दिया।
केरल के तिरुवनंतपुरम में नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी (NALSA) की तरफ से आयोजित मानव-वन्यजीव संघर्ष पर एक क्षेत्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, जस्टिस नाथ ने कहा कि वह भारत के चीफ जस्टिस बीआर गवई को भी शुक्रिया अदा करना चाहते हैं जिन्होंने यह केस उन्हें सौंपा।
दरअसल, 22 अगस्त को जस्टिस विक्रम नाथ,जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की स्पेशल बेंच ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा कि जिन कुत्तों को पकड़ा जाता है, उनकी नसबंदी और टीकाकरण कर जहां से उठाया है, वहीं वापस छोड़ दिया जाए। ये आदेश दिल्ली समेत पूरे देश में लागू होगा।

सुप्रीम कोर्ट बोला- नेशनल लेवल पर पॉलिसी जरूरी, अब अक्टूबर में सुनवाई
- जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा- इसके लिए नेशनल लेवल पर पॉलिसी बननी चाहिए। हमने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया है।
- देश के बाकी हाईकोर्ट में जहां भी मामले लंबित हैं, उन्हें सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर किया जाए। अगली सुनवाई आठ हफ्ते बाद अक्टूबर के लिए लिस्ट कर दी है।



—————————————————-
मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…
कुत्तों के हमले से बच्ची की मौत, हर 5 डॉग बाइट विक्टिम में 1 बच्चा; समझें आवारा कुत्तों का बिहेवियर

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहां 6 साल की मासूम बच्ची पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। कुत्ते बच्ची को मुंह में दबाकर एक किनारे ले गए और नोच-नोच कर मार डाला। तो चलिए, आज जरूरत की खबर में बात करेंगे कि आवारा कुत्तों से हमलों के पीछे की वजहें क्या हैं? पूरी खबर पढ़ें…