नई दिल्ली2 मिनट पहले
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गृह मंत्री अमित शाह ने आज कहा कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जेल जाकर भी इस्तीफा नहीं दिया था। इस पर केजरीवाल ने कहा कि आज दिल्ली वाले उनकी जेल वाली सरकार को याद कर रहे हैं। क्यों कि पिछले सात महीनों में भाजपा ने दिल्ली का बुरा हाल कर दिया है।
केजरीवाल ने कहा- राजनीतिक षड्यंत्र के तहत झूठे केस में फंसाकर जब केंद्र ने मुझे जेल भेजा तो मैंने जेल से 160 दिन सरकार चलाई। कम से कम जेल वाली सरकार के वक्त बिजली नहीं जाती थी, पानी आता था। उन्होंने कहा,
अस्पतालों और मोहल्ला क्लिनिक में फ्री दवाईयां मिलती थीं, फ्री टेस्ट होते थे, एक बारिश में दिल्ली का इतना बुरा हाल नहीं होता था, प्राइवेट स्कूलों को मनमानी और गुंडागर्दी करने की इजाजत नहीं थी।

AAP के संयोजक केजरीवाल ने PM-CM और मंत्री को गिरफ्तारी के बाद हटाने वाले बिल पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने शाह से सवाल किया कि अगर किसी पर झूठा केस लगाकर उसे जेल में डाला जाए और बाद में वो दोषमुक्त हो जाए, तो उस पर झूठा केस लगाने वाले मंत्री को कितने साल की जेल होनी चाहिए?

शाह बोले- जेल जाने के बाद भी दिल्ली के सीएम ने भी इस्तीफा नहीं दिया
शाह ने कहा था कि अगर कोई पांच साल से ज्यादा सजा वाले केस में जेल जाता है और उसे 30 दिन में बेल नहीं मिलती तो उसे पद छोड़ना पड़ेगा। कोई छिटपुट आरोप के लिए पद नहीं छोड़ना पड़ेगा। मगर जिन पर करप्शन के आरोप हैं, या पांच साल से ज्यादा सजा के आरोप हैं, ऐसे मंत्री, CM या PM जेल में बैठकर सरकार चलाएं ये कितना उचित है?
आजकल नई परंपरा आ गई है। दो साल पहले ऐसा कोई मामला नहीं था। दिल्ली के सीएम और गृहमंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया था। राजनीति को बदनाम करने और सामाजिक नैतिकता को इस स्तर तक गिराने के लिए हम इससे सहमत नहीं हैं। पूरी खबर पढ़ें…
अमित शाह ने न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में आज संविधान (130वां संशोधन) विधेयक के बारे में बताया। उन्होंने इस बिल का विरोध कर रहे विपक्ष की भी आलोचना की।

शाह के इंटरव्यू पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया..
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा- ‘ये जो कानून ला रहे हैं, उसका न खाता न बही, जो भाजपा कहे वह सही। ED, CBI इनकी पालतू एजेंसियां हैं। उसके जरिए ये विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार कराएंगे।’ खेड़ा ने कहा,
30 दिन तक जमानत नहीं होने देंगे, 31वें दिन उन्हें इस्तीफा देना होगा और ये कहते हैं कि प्रधानमंत्री पर भी लागू होता है, आप 11 साल में एक मंत्री बता दें जिसके खिलाफ ED, CBI ने कोई एक्शन लिया हो। आप तो वॉशिंग मशीन वाले लोग हैं।

AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा- ‘केंद्र सरकार जांच एजेंसियों की नियुक्ति करती है, चाहे वो सीबीआई हो या ईडी। जब तक नियुक्तियां स्वतंत्र रूप से नहीं होंगी, तब तक यह सवाल बना रहेगा कि ये एजेंसियां सरकार के निर्देशन में काम करती हैं।’
ओवैसी ने कहा- ‘यूपीए के समय में भी यही स्थिति थी। संविधान (अनुच्छेद) में प्रावधान है कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह से निर्देशित होंगे। प्रस्तावित विधेयक कहता है कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को हटा सकते हैं। लेकिन कैसे? यह विधेयक उस अनुच्छेद के विपरीत है। क्या राष्ट्रपति किसी प्रधानमंत्री को इस्तीफा दिला सकते हैं?’