बेंगलुरु35 मिनट पहले
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा किसी विशेष धर्म या आस्था को मानने वाले व्यक्ति का किसी दूसरे धर्म के त्योहारों में शामिल होना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं है।
हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी मैसूर में दशहरा उत्सव के उद्घाटन के लिए बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक को आमंत्रित किए जाने से जुड़े मामले में की।
जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस सीएम जोशी की बेंच ने राज्य सरकार के इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।
बेंच ने कहा संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धर्म का पालन और प्रचार करने के अधिकार को केवल मुश्ताक नामक सेलेब्रिटी को बुलाने तक सीमित नहीं किया जा सकता।

लेखिका बानू मुश्ताक, जिन्हें मैसूर दशहरा उत्सव के लिए कर्नाटक सरकार ने मुख्य अतिथि बनाकर बुलाया गया है।
याचिका में कहा था- मुस्लिम का हिंदू अनुष्ठान में शामिल होना गलत
इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि बानू के लिए हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होना गलत होगा। क्योंकि इन अनुष्ठानों में पवित्र दीप जलाना, देवता को फल-फूल चढ़ाना और वैदिक प्रार्थनाएं करनी होती हैं। यह भी कहा गया था कि ऐसी प्रथाएं केवल एक हिंदू ही कर सकता है।
हालांकि राज्य सरकार ने कहा था कि यह राज्य का समारोह है, किसी मंदिर या धार्मिक संस्थान का नहीं। इसलिए धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।