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देहरादून19 मिनट पहलेलेखक: मनमीत
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थर्मल इमेजिंग कैमरों और डॉग स्क्वॉड की मदद से हादसे वाले इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद आई आपदा में तबाह हुआ धराली गांव अब दोबारा उस जगह नहीं बसेगा। सोमवार को सीएम हाउस में हुई बैठक में यह फैसला हुआ है।
तय हुआ कि धराली गांव सुरक्षित जगह शिफ्ट होगा। नदियों के किनारे और लैंडस्लाइड वाले संवेदनशील क्षेत्रों में कोई भी नया निर्माण नहीं होगा। इस तरह की संवेदनशील जगहों वाले अन्य गांव भी शिफ्ट किए जा सकते हैं।
बीते 10 साल में धराली इलाके में तीन आपदाएं आईं। तीन बार गांव तबाह हुआ, लेकिन हर बार स्थानीय लोगों ने वहां नई इमारतें खड़ी कर लीं। फिलहाल आपदा के 7 दिन बाद भी धराली गांव लाखों टन मलबे में दबा है।
उत्तरकाशी के धराली में 5 अगस्त को दोपहर 1.45 बजे बादल फट गया था। खीर गंगा नदी में बाढ़ आने से 34 सेकेंड में धराली गांव जमींदोज हो गया था। सरकार ने सोमवार को बताया कि कुल 43 लोगों लापता हैं। इनमें से एक ही शव मिल पाया है।
धराली में हुए हादसे को इस तस्वीर से समझें…

धराली के विस्थापन के लिए लोगों से बातचीत शुरू अपर सचिव बंशीधर तिवारी ने बताया कि धराली के विस्थापन के लिए स्थानीय लोगों से चर्चा शुरू कर दी है। लोग चाहते हैं कि उन्हें 8 से 12 किमी दूर लंका, कोपांग या जांगला में बसाया जाए। वहीं, हर्षिल में आई आपदा में सेना का कैंप भी बह गया था। इसलिए नया कैंप लगाने के लिए सेना श्रीखंड पर्वत और आसपास के ग्लेशियरों, झीलों की रेकी करेगी।
मैप से समझिए घटनास्थल को…

स्थानीय लोग बोले- 60 से ज्यादा लोग लापता पहले दिन सरकार ने 4 लोगों की मौत और 30 लोगों के लापता होने की पुष्टि की थी। जबकि 10 अगस्त को कहा गया कि 15 लोग लापता हैं, इनका कहीं कुछ पता नहीं। दूसरी तरफ, स्थानीय लोग 60 के लापता होने की बात शुरू से कहते रहे, लेकिन मौसम और सड़कें टूटी होने के चलते इन्हें ढ़ूंढ़ने के प्रयास शुरू नहीं हो पाए।
लापता में 29 नेपाली मजदूर भी थे। मोबाइल नेटवर्क आने के बाद इनमें से 5 से संपर्क हो गया है। 24 की तलाश जारी है।

धराली के गांव के मलबे में 100 से ज्यादा लोगों के दबे होने की आशंका है।

गंगनानी में टूटा पुल बनकर तैयार हो गया है। यह ब्रिज उत्तरकाशी को धराली से जोड़ता है।
भास्कर ने लापता लोगों के परिजन से बात की भास्कर टीम ने धराली में मौजूद ऐसे 7 परिवारों से बात की, जिनके अपने लापता हैं। ये परिवार अब शव मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं- गोंडा निवासी राकेश ठेकेदार। यह अभी धराली में हैं। उन्होंने बताया कि 5 अगस्त को दोपहर डेढ़ बजे मेरा 14 सदस्यीय दल प्रगति होटल में वेल्डिंग और पेंटिंग का काम कर रहा था। मैं नजदीक के होटल में खाना खा रहा था। तभी चीखने-चिल्लाने की आवाजें आने लगीं। मैं भागा और दूर पहुंच गया। बाकी साथी लापता हो गए। अब तक 10 मिल हैं। 4 का पता नहीं चला
इसी तरह, जयदेव पंवार बताते हैं कि उस दिन हम लोग गांव के समेश्वर मंदिर गए थे। इसलिए बच गए। लेकिन, मेरे सामने 8 लोग मलबे में दब गए थे। इनमें से आकाश पंवार का शव ही मिला है। तीन साल की बच्ची समेत 7 लोग अब भी लापता हैं। मलबा अब सख्त हो चुका है। ऐसे में सुमित, शुभम, गौरव, धनी, मुकेश, विजया का मिल पाना मुश्किल है। हमारा सबकुछ तबाह हो गया। अब हम उनके शव के इंतजार में यहां रुके हैं।
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5 दिन बीत चुके हैं, उत्तराखंड के धराली में बीती 5 अगस्त को हुई लैंड स्लाइड के बाद से अब तक रास्ता नहीं खुला है। बर्बाद हो चुके धराली तक मदद पहुंचाने या आने-जाने का एक ही तरीका है- हेलिकॉप्टर। दैनिक भास्कर बीते 5 दिन से इस तबाही की कवरेज कर रहा है, लेकिन अब तक हम धराली तक नहीं पहुंच पा रहे थे। वजह थी खराब रास्ता और टूटे पुल। पूरी खबर पढ़ें…