नई दिल्ली5 मिनट पहले
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दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले में सुनवाई के दौरान कहा- सिर्फ इसलिए कि कोई महिला रो रही थी, इसे दहेज उत्पीड़न का मामला नहीं माना जा सकता। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने यह बात उस याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें पति और उसके परिवार को दहेज उत्पीड़न के आरोपों से बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट ने कहा, इस मामले में क्रूरता के कारण मृत्यु का कोई सबूत नहीं है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण निमोनिया बताया गया है। मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई। इसलिए धारा 498A IPC के तहत उत्पीड़न का मामला नहीं बनता।

अब पूरा मामला समझिए…
दरअसल, महिला की शादी दिसंबर 2010 में हुई थी। उसने 2 बेटियों को जन्म भी दिया था। महिला की 31 मार्च 2014 को मृत्यु हो गई थी।
मृतक के परिवार का आरोप था कि उन्होंने शादी में करीब 4 लाख रुपए खर्च किए। बाद में पति और ससुराल वालों ने मोटरसाइकिल, नकदी और सोने का कंगन मांगा।
ट्रायल कोर्ट ने महिला की मौत का कारण निमोनिया होने की वजह से आरोपियों (पति और परिवार वालों) को बरी कर दिया था। इसी फैसले के खिलाफ मृतक के परिजन हाईकोर्ट गए थे।
HC बोला- महिला के पिता ने कोई घटना जिक्र नहीं किया
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि महिला के पिता ने न तो किसी विशेष घटना का जिक्र किया और न ही यह साबित किया कि उन्होंने पैसे दिए थे। केवल आरोप लगाने से ही दहेज उत्पीड़न का केस साबित नहीं होता।