नई दिल्ली10 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली में पटाखों को बैन करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि अगर दिल्ली-NCR के शहरों को साफ हवा का हक है तो दूसरे शहरों के लोगों को क्यों नहीं?
प्रदूषण नियंत्रण को लेकर चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर पटाखों पर प्रतिबंध लगाना है तो पूरे देश में बैन करना चाहिए। साफ हवा का अधिकार सिर्फ दिल्ली-NCR तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि पूरे देश के नागरिकों को मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संबंधी जो भी नीति हो वह पूरे भारत में होनी चाहिए। हम सिर्फ दिल्ली के लिए इसलिए नीति नहीं बना सकते क्योंकि यहां देश के एलीट वर्ग हैं।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के 3 अप्रैल 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री, स्टोरेज, परिवहन और निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध के आदेश को संशोधित करने की मांग की गई है।

सीनियर एडवोकेट बोलीं- अमीर लोग प्रदूषण होने पर दिल्ली से चले जाते हैं
सुनवाई के दौरान एमिकस सीनियर एडवोकेट अपराजिता सिंह ने कहा कि कुलीन वर्ग अपना ध्यान रखता है। प्रदूषण होने पर वे दिल्ली से बाहर चले जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में पटाखों पर पूरी तरह बैन के खिलाफ याचिका पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को नोटिस जारी किया और दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा।
इससे पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखा बैन मामले पर अप्रैल में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे बेहद जरूरी बताया था। कोर्ट का कहना था कि प्रतिबंध को कुछ महीनों तक सीमित करने से कोई मकसद पूरा नहीं होगा। लोग पूरे साल पटाखों को इकट्ठा करेंगे और उस समय बेचेंगे, जब बैन लगा होगा।
दिल्ली में 14 अक्टूबर को ग्रैप-1 लागू किया गया था
दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 पार होने के बाद 14 अक्टूबर को दिल्ली NCR में ग्रैप-1 लागू कर दिया गया था। इसके तहत होटलों और रेस्तरां में कोयला और जलाऊ लकड़ी के उपयोग पर बैन है। कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने एजेंसियों को पुराने पेट्रोल और डीजल गाड़ियों (बीएस -III पेट्रोल और बीएस-IV डीजल) के संचालन पर सख्त निगरानी के आदेश दिए हैं।
आयोग ने एजेंसियों से सड़क बनाने, रेनोवेशन प्रोजेक्ट और मेंटेनेंस एक्टिविटीज में एंटी-स्मॉग गन, पानी का छिड़काव और डस्ट रिपेलेंट तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने के लिए भी कहा है।

हाई लेवल से ऊपर AQI खतरा
AQI एक तरह का थर्मामीटर है। बस ये तापमान की जगह प्रदूषण मापने का काम करता है। इस पैमाने के जरिए हवा में मौजूद CO (कार्बन डाइऑक्साइड ), OZONE, (ओजोन) NO2 (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड), PM 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) और PM 10 पोल्यूटेंट्स की मात्रा चेक की जाती है और उसे शून्य से लेकर 500 तक रीडिंग में दर्शाया जाता है।
हवा में पॉल्यूटेंट्स की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, AQI का स्तर उतना ज्यादा होगा। और जितना ज्यादा AQI, उतनी खतरनाक हवा। वैसे तो 200 से 300 के बीच AQI भी खराब माना जाता है, लेकिन अभी हालात ये हैं कि राजस्थान, हरियाणा दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ये 300 के ऊपर जा चुका है। ये बढ़ता AQI सिर्फ एक नंबर नहीं है। ये आने वाली बीमारियों के खतरे का संकेत भी है।


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दिल्ली में पटाखे बैन, ऑनलाइन डिलीवरी भी नहीं होगी

दिवाली से पहले दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रण में रखने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने 15 अक्टूबर को 1 जनवरी 2025 तक पटाखों को बैन कर दिया था। सरकार के आदेश के मुताबिक पटाखे बनाने, उन्हें स्टोर करने, बेचने और इस्तेमाल पर बैन है। इतना ही नहीं पटाखों की ऑनलाइन डिलीवरी भी प्रतिबंधित रहेगी। इसमें ग्रीन पटाखे भी शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें…
दिवाली में बैन के बावजूद दिल्ली में चले पटाखे, रात में AQI 400 पार पहुंचा

राजधानी दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। यहां टाइम एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) देर रात 400 के पार चला गया। 1 नवंबर को सुबह करीब 6 बजे दिल्ली AQI 391 दर्ज किया गया। देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों की बात करें तो इनमें 9 उत्तर प्रदेश के हैं। UP के संभल में AQI सबसे ज्यादा 388 दर्ज किया गया।
दिल्ली में दीपावली के दिन (31 अक्टूबर) शाम 5 बजे रियल टाइम AQI 186 रिकॉर्ड किया गया था। यानी 10-12 घंटों में ही हवा सामान्य से बेहद खराब कैटेगरी में चली गई। पूरी खबर पढ़ें…