नई दिल्ली4 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि जामनगर स्थित वनतारा वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में जानवरों की खरीद-बिक्री नियमों के दायरे में हुई है। इस सेंटर को अंबानी परिवार का रिलायंस फाउंडेशन चलाता है।
कोर्ट ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा,
अब इस मामले को बार-बार उठाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। स्वतंत्र समिति ने जांच की है और हम उसी पर भरोसा करेंगे।

इससे पहले SC ने 26 अगस्त को 2 पब्लिक इंटरेस्ट पिटीशन (PIL) पर SIT बनाने का आदेश दिया था। एक वकील सीआर जया सुकीन और दूसरी याचिका देव शर्मा ने जुलाई में कोल्हापुर के मंदिर से हाथी ‘माधुरी’ को वनतारा में ले जाने के विवाद के बाद दायर की थी।

SIT रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी
वनतारा के वकील हरीश साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए। उनका तर्क था कि अगर रिपोर्ट बाहर आई तो न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे अखबार उसका केवल कुछ हिस्सा छापकर गलत नैरेटिव बना देंगे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होगी।
SIT ने 12 सितंबर को रिपोर्ट सौंपी
4 सदस्यीय SIT का नेतृत्व पूर्व जज जस्टिस जे. चेलमेश्वर ने किया था और टीम में जस्टिस राघवेंद्र चौहान (पूर्व चीफ जस्टिस, उत्तराखंड व तेलंगाना HC), पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले और कस्टम्स अधिकारी अनिश गुप्ता शामिल थे।
SIT ने 12 सितंबर को रिपोर्ट सौंप दी थी। कोर्ट ने SIT की सराहना की और कहा कि समिति को मानदेय भी दिया जाए।
SIT ने 5 पॉइंट्स पर जांच की
- भारत और विदेश से, विशेषकर हाथियों के अधिग्रहण में- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, चिड़ियाघरों के नियम, अंतरराष्ट्रीय प्रजाति व्यापार संधि (CITES), आयात-निर्यात कानूनों और अन्य वैधानिक आवश्यकताओं का पालन हुआ या नहीं।
- पशुपालन मानकों, पशु-चिकित्सा देखभाल, पशु कल्याण, मृत्यु दर और उनके कारणों, जलवायु और स्थान संबंधी शिकायतों की।
- निजी संग्रह बनाने के आरोपों, प्रजनन और संरक्षण कार्यक्रमों, जैव विविधता संसाधनों के उपयोग, कानूनी उल्लंघनों, वन्यजीव तस्करी और पशु उत्पादों के व्यापार आदि मामले में।
- वित्तीय अनुपालन, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य संबंधित मुद्दों की शिकायतों की।
- इसके अलावा जरूरत के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं, अधिकारियों, नियामकों, हस्तक्षेपकर्ताओं और पत्रकारों से भी जानकारी ली।
पहले समझिए मामला क्या है

हथिनी माधुरी 1992 से स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ में रह रही थी।
16 जुलाई को बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि हथिनी माधुरी को वनतारा में शिफ्ट किया जाए। यह आदेश PETA इंडिया की ओर से हथिनी की सेहत, गठिया और मानसिक तनाव को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद दिया गया था।
इससे पहले दिसंबर 2024 में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने हथिनी के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए उसे गुजरात के वनतारा पशु अभयारण्य में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। फिर 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखा था। यह मामला 2023 से चल रहा है।
माधुरी को वनतारा शिफ्ट किए जाने पर कोल्हापुर में जुलाई के आखिरी हफ्ते में विरोध प्रदर्शन हुए। लोगों ने उसको वापस लाने के लिए हस्ताक्षर किए। धार्मिक परंपराओं और भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।
14 अगस्त: कोर्ट ने याचिका में वनतारा को पक्षकार बनाने को कहा
माधुरी को वापस लाने वाली याचिका पर पहली सुनवाई 14 अगस्त को हुई थी। इस दौरान जस्टिस पंकज मित्तल और पीबी वराले की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील सीआर जया सुकीन से कहा था कि वह वनतारा पर आरोप लगा रहे हैं। जबकि उसे याचिका में पक्षकार के रूप में शामिल ही नहीं किया गया है।
अदालत ने उन्हें वनतारा को पक्षकार बनाने और फिर मामले में लौटने को कहा, साथ ही मामले की सुनवाई की तारीख 25 अगस्त तय की। इससे पहले CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ 11 अगस्त को हथिनी को वनतारा भेजने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई को सहमत हुई थी।

नांदणी जैन मठ में पूजा कर माधुरी को विदाई दी गई थी।
जैन मठ में 32 साल से रह रही थी
कोल्हापुर के नांदणी गांव के जैन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ में माधुरी नाम की हथिनी को 1992 में लाया गया था। इस जैन मठ में 700 सालों से ये परंपरा है कि यहां हाथी पाला जाता है। यह धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। यहां माधुरी हथिनी को तब लाया गया था, जब वह सिर्फ 4 साल की थी। वह यहां 32 सालों से रह रही थी।

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