- Hindi News
- National
- Sonam Wangchuk Arrest Case; Gitanjali Angmo Supreme Court | Leh Ladakh Violence
नई दिल्ली8 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
सोनम की पत्नी गीतांजलि ने कहा कि उन्हें पति से बात तक नहीं करने दी गई है।
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने अपने पति की रिहाई की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। गीतांजलि जे अंगमो ने वांगचुक पर पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी के संपर्क में होने के आरोपों का खंडन किया है।
वांगचुक फिलहाल जोधपुर की जेल में हैं, उन्हें 24 सितंबर को लेह हिंसा भड़काने के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत 26 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। हिंसा में 4 लोग मारे गए थे।
सोनम के अलावा लेह की स्थानीय जेल में बंद 56 आंदोलनकारियों में से 26 को 2 अक्टूबर को छोड़ दिया गया। इन पर गंभीर धाराएं नहीं थीं। 30 लोग अभी जेल में हैं।
इधर, वांगचुक के नेतृत्व में हुए आंदोलन के सक्रिय सदस्य स्टेनजिन दोरजे ने 1 अक्टूबर की सुबह घर में फंदा लगा आत्महत्या कर ली। वे वांगचुक के प्रशंसक और सहयोगी बताए जाते हैं।
वांगचुक की पत्नी बोलीं- एक हफ्ता बीता, डिटेंशन ऑर्डर कॉपी नहीं मिली
गीतांजलि ने X पर एक पोस्ट में लिखा- आज एक हफ्ता हो गया है। अभी भी मुझे सोनम की सेहत, उनकी हालत और नजरबंदी के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अंगमो ने वकील सर्वम ऋतम खरे के माध्यम से दायर याचिका में वांगचुक की हिरासत को चुनौती दी है। साथ ही उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है।
वांगचुक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने के फैसले पर भी सवाल उठाया है। अंगमो का आरोप है कि उन्हें अभी तक हिरासत आदेश की कॉपी नहीं मिली है, जो नियमों का उल्लंघन है।
लेह में 9 दिन बाद कर्फ्यू में ढील, स्कूल खुले
लेह में लद्दाख प्रशासन के कर्फ्यू में ढील दिए जाने के बाद लोगों के रोजमर्रा के काम फिर से शुरू हो गए हैं। ढील के तहत दुकानों को सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खोलने की अनुमति दी गई। स्कूल कई दिनों के बंद रहने के बाद फिर से खुल गए हैं। लेह डीएम ने मिनी बसों और बाकी पब्लिक ट्रांसपोर्ट को भी 9 दिनों के बाद फिर से शुरू करने की परमिशन दे दी है।
पीएम, प्रेसिडेंट और गृह मंत्री को लेटर लिख चुकीं अंगमो
अंगमो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, गृह मंत्री अमित शाह, लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और लेह जिला कलेक्टर को लेटर लिखा था। जिसकी कॉपी उन्होंने X पर शेयर की।
अंगमो का आरोप है कि वांगचुक को शांत कराने के लिए पिछले महीने से विच हंट शुरू किया गया है। अंगमो ने कहा कि वांगचुक कभी भी किसी के लिए खतरा नहीं हो सकते, अपने राष्ट्र की तो बात ही छोड़ दें”।
भाजयुमो के पूर्व वर्कर ने खुदकुशी की, वांगचुक की गिरफ्तारी से सदमे में था
वांगचुक के नेतृत्व में हुए आंदोलन के सक्रिय सदस्य स्टेनजिन दोरजे ने 1 अक्टूबर की सुबह घर में फंदा लगा आत्महत्या कर ली। वे वांगचुक के प्रशंसक और सहयोगी बताए जाते हैं। 38 साल के स्टेनजिन लेह से 100 किमी दूर स्किटमंग गांव में रहते थे।
सरकार द्वारा छठी अनुसूची और पूर्ण राज्य का दर्जा देने का वादा पूरा नहीं करने पर यह कदम उठाया था।वांगचुक के साथ जुड़ने से पहले वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के सक्रिय सदस्य थे। 2020 में दोरजे ने भाजयुमो छोड़ दिया था।

सोनम की गिरफ्तारी के बाद पत्नी के 3 रिएक्शन…
2 अक्टूबर: केंद्र सरकार पर पुलिस के जरिए उत्पीड़न का आरोप
गीतांजलि ने X पर एक पोस्ट लिखा, जिसमें सवाल किया- क्या भारत सचमुच आजाद है। 1857 में 24,000 अंग्रेजों ने महारानी के आदेश पर 30 करोड़ भारतीयों पर अत्याचार करने के लिए 1.35 लाख भारतीय सिपाहियों का इस्तेमाल किया था। आज, गृह मंत्रालय के आदेश पर, एक दर्जन प्रशासक 2400 लद्दाखी पुलिस का दुरुपयोग करके 3 लाख लद्दाखियों पर अत्याचार और अत्याचार कर रहे हैं।
1 अक्टूबर: राष्ट्रपति को लेटर, पति की रिहाई की मांग की
गीतांजलि आंगमो ने बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा। उन्होंने अपील की कि राष्ट्रपति एक आदिवासी होने के चलते लद्दाख के लोगों की भावनाओं को समझें। अंगमो यह लेटर PM नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को भी भेजा है। पत्र में अंगमो ने सोनम वांगचुक की बिना शर्त रिहाई की मांग की है। सोनम को उन्होंने जलवायु परिवर्तन और पिछड़े आदिवासी क्षेत्र के विकास के लिए आंदोलन करने वाला शांतिपूर्ण गांधीवादी प्रदर्शनकारी बताया है।
28 सितंबर: पाकिस्तान से जुड़े होने के आरोपों का खंडन किया
गीतांजलि ने पति पर पाकिस्तान से जुड़े होने के आरोपों का खंडन किया है। न्यूज एजेंसी PTI से उन्होंने रविवार को कहा था कि वांगचुक ने हमेशा गांधीवादी तरीके से प्रदर्शन किया है और 24 सितंबर की हिंसा के लिए CRPF जिम्मेदार हैं। अंगमो ने स्पष्ट किया कि उनके पति की पाकिस्तान की यात्राएं जलवायु परिवर्तन से जुड़ी थीं। हम संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में गए थे। हिमालय के ग्लेशियर के पानी में हम भारत या पाकिस्तान नहीं देखते।